बागवानी विभाग रामपुर द्वारा ग्राम पंचायत कूहल और बोंडा में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य सेब बागवानों को बागानों में लगने वाले विभिन्न रोगों एवं कीटों के वैज्ञानिक तथा समेकित प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान कूहल, बोंडा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बागवानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से पौध संरक्षण एवं नवीन तकनीकों की विस्तृत जानकारी हासिल की। इस अवसर पर ग्राम पंचायत कूहल के प्रधान महेंद्र सिंह मेहता, उपप्रधान चंद्रकांत, बागवानी विकास अधिकारी रामपुर डॉ. प्रवीण मेहता, बागवानी प्रसार अधिकारी देवठी डोला राम, विभागीय कर्मचारियों सहित कूहल, बोंडा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में बागवान उपस्थित रहे। कार्यक्रमों के दौरान विषय विशेषज्ञों ने बागवानों को वर्तमान मौसम में सेब बागानों को नुकसान पहुंचाने वाले मुख्य रोगों और कीटों के प्रति सचेत किया।
बागवानों की जिज्ञासाओं का किया गया समाधान शिविर के दौरान उपस्थित बागवानों ने पौध संरक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन, स्प्रे शेड्यूल और रोग नियंत्रण से संबंधित अपनी विभिन्न समस्याएं और प्रश्न रखे। विभागीय अधिकारियों ने बागवानों की सभी जिज्ञासाओं का वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया।
अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, मार्सोनिना और माइट्स पर विशेष चर्चा रोगों की पहचान व लक्षण: बागवानों को अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट (Alternaria Leaf Spot), मार्सोनिना लीफ ब्लॉच (Marssonina Leaf Blotch) और माइट्स (Mites) के प्रारंभिक लक्षणों, उनके पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियों और बागानों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। समेकित प्रबंधन: बागवानों को सलाह दी गई कि वे बागानों में नियमित सफाई रखें, संतुलित पोषण प्रबंधन (Nutrient Management) करें और बीमारी के लक्षण दिखते ही अनुशंसित फफूंदनाशकों (Fungicides) एवं कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग करें।
वैज्ञानिक खेती और अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल अपनाने की सलाह विषय वस्तु विशेषज्ञ (बागवानी) रामपुर डॉ. संजय कुमार चौहान ने बताया कि बरसात और वर्तमान मौसम के दौरान सेब के बागानों में फफूंद जनित रोगों और माइट्स का प्रकोप तेजी से बढ़ने की संभावना रहती है। नियमित निरीक्षण: डॉ. चौहान ने बागवानों को अपने बागानों की लगातार निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत प्रबंधन उपाय शुरू करने को कहा। स्प्रे शेड्यूल का पालन: उन्होंने जोर दिया कि बागवानी विभाग द्वारा जारी अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल का समयबद्ध पालन करने से न केवल बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है, बल्कि फलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन व तकनीकी परामर्श: बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने पारंपरिक तरीकों के बजाय वैज्ञानिक खेती अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बागवानों से मौसम आधारित सलाह का पालन करने और किसी भी समस्या के समाधान के लिए निकटतम बागवानी कार्यालय से संपर्क करने का आह्वान किया।