हिमाचल के देहरा से भाजपा के पूर्व विधायक होशियार सिंह ने प्रदेश में पिछले 10 वर्षों के दौरान ऐच्छिक निधि के उपयोग की व्यापक जांच की मांग उठाई है। उन्होंने ऐलान किया कि वह जल्द ही हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे। इस याचिका में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष, प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों, विभिन्न बोर्ड एवं निगमों के अध्यक्षों तथा सभी विधायकों द्वारा ऐच्छिक निधि के उपयोग की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग की जाएगी। होशियार सिंह ने कहा कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है। उनका कहना है कि ऐच्छिक निधि से किसे, कितनी राशि और किस प्रक्रिया के तहत लाभ दिया गया, इसकी जानकारी जनता को मिलनी चाहिए। सार्वजनिक धन किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की अमानत है और उसके प्रत्येक रुपये का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। उनका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में समान और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास पूर्व विधायक ने कहा, “अगर जांच होगी तो सबकी होगी और अगर हिसाब होगा तो सबका होगा।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक पारदर्शी जांच से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और मजबूत होगा तथा सुशासन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई सामने आएगी और सार्वजनिक धन के उपयोग का पूरा लेखा-जोखा जनता के सामने रखा जाएगा। क्या था मामला?
देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर राज्य विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामला दर्ज किया था। आरोप था कि विधायक ऐच्छिक निधि से जिन लाभार्थियों को आर्थिक सहायता दी गई, उनमें से कुछ लोगों से बाद में राशि वापस ली गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर विजिलेंस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

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