हिमाचल के स्टेट इन्फॉर्मेशन कमीशन एक साल से सफेद हाथी साबित हो रहा है। कमीशन के पास 1600 से अधिक शिकायतें लंबित हो चुकी हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार एक साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (IC) की नियुक्ति नहीं कर पाई है। हालांकि, इन पदों को भरने के लिए तीन बार आवेदन मांगे जा चुके हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म डिपार्टमेंट ने इच्छुक दावेदारों से तीसरी बार फरवरी 2026 में आवेदन मांगे थे। इसकी अंतिम तिथि 20 मार्च थी। इससे पहले दो बार (जून 2025 और दिसंबर 2025) आवेदन मांगे गए। सूत्रों के अनुसार 20 से ज्यादा लोगों ने CIC और IC के लिए आवेदन कर रखा है। मगर सरकार नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रही। CIC और IC की तैनाती नहीं होने से अपीलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। पुरानी शिकायतें भी नहीं सुनी जा रही। इससे लोगों को RTI के तहत सूचनाएं नहीं मिल पा रही। CIC-IC का क्या काम? सरकारी विभाग से जब कोई व्यक्ति RTI के तहत सूचना मांगता है और संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी (PIO) जानकारी देने से इनकार करते या गलत सूचना देते हैं, तो उस स्थिति में लोग संबंधित विभाग की फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी के पास पहली अपील करते हैं। फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी से भी जब सूचना नहीं मिलती, तब सूचना मांगने वाला व्यक्ति इन्फॉर्मेशन कमीशन के पास पहुंचता है। इसके बाद सूचना आयोग अपीलकर्ता और संबंधित विभाग, दोनों को सुनता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग RTI के तहत मांगी गई जानकारी देने को लेकर फैसला सुनाता है। कब से खाली पड़े CIC-IC के पद? हिमाचल में पूर्व IAS आरडी धीमान CIC और एसएस गुलेरिया IC थे। एसएस गुलेरिया 3 जुलाई 2025 को रिटायर हुए। जून 2025 में ही आरडी धीमान को रेरा (रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण) में चेयरमैन लगाया गया। तब से CIC का पद भी खाली पड़ा है। यानी एक साल से अधिक समय बीत गया। नए CIC-IC की नियुक्ति नहीं हो पाई। कौन बन सकता है CIC और IC? CIC और IC बनने के लिए व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित होना चाहिए, जिसके पास लॉ, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार माध्यम या प्रशासन और शासन जैसे क्षेत्रों में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो। ऐसे व्यक्ति CIC और IC बन सकते हैं। संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य इसके लिए आवेदन नहीं कर सकता।