हिमाचल प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और आठ बार के विधायक रहे कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया है। सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने के बाद कौल सिंह ठाकुर ने अब आध्यात्मिक मार्ग चुन लिया है और वे संत रामपाल की शरण में पहुंच गए हैं। इस मुलाकात का एक वीडियो संत रामपाल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किया गया है, जो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। परिवार सहित पहुंचे आश्रम, दंडवत प्रणाम कर भेंट की हिमाचली टोपी वायरल वीडियो में हिमाचल कांग्रेस के कद्दावर नेता कौल सिंह ठाकुर अपनी धर्मपत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ संत रामपाल के आश्रम में नजर आ रहे हैं। उन्होंने संत रामपाल का अभिवादन किया और उनके चरणों में दंडवत प्रणाम कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान ठाकुर ने संत रामपाल को हिमाचली संस्कृति का प्रतीक ‘हिमाचली टोपी’ भेंट की, जबकि उनकी पत्नी ने हिमाचल के विशेष जैविक (ऑर्गेनिक) फल उन्हें सौंपे। वीडियो में ठाकुर अपनी पत्नी के खराब स्वास्थ्य को लेकर भी संत रामपाल से मार्गदर्शन और आशीर्वाद मांगते दिख रहे हैं। 8 बार विधायक और 4 बार मंत्री का सफर, अब अध्यात्म की ओर संत रामपाल से बातचीत के दौरान कौल सिंह ठाकुर ने अपने दशकों लंबे और शानदार राजनीतिक सफर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वे 8 बार विधायक चुने गए। 4 बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 1 बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) की जिम्मेदारी संभाली। 2 बार हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (HPCC) के अध्यक्ष रहे। ठाकुर ने कहा कि एक लंबा जीवन राजनीति और जनता की सेवा में बिताने के बाद, अब वे इस सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह अलग होकर अपना शेष जीवन आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर बिताना चाहते हैं। उन्होंने संत रामपाल को हर साल मई और जून के महीनों में हिमाचल प्रदेश आने का विशेष निमंत्रण भी दिया। संत रामपाल ने दी दीक्षा लेने की सलाह मुलाकात के दौरान संत रामपाल ने कौल सिंह ठाकुर को दीक्षा (नामदान) लेने और पूर्ण रूप से भक्ति का मार्ग अपनाने की सलाह दी। उन्होंने पूर्व मंत्री को आध्यात्मिक साधना, मंत्रों की महत्ता और जीवन के वास्तविक उद्देश्य के बारे में विस्तार से समझाया।हिमाचल के इतने बड़े राजनीतिक चेहरे का अचानक संन्यास लेकर उनके पास जाना राज्य में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कौल सिंह ठाकुर का यह कदम हिमाचल की राजनीति में एक बड़े युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। संत रामपाल की शरण में जाने को लेकर सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। गौरतलब है कि संत रामपाल अतीत में देवी-देवताओं और पारंपरिक पूजा-पद्धतियों पर टिप्पणियों के कारण विवादों में रह चुके हैं, जिसका कई हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध किया था।

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