जनजातीय क्षेत्र भरमौर की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राजकीय माध्यमिक विद्यालय सामरा में एक टीजीटी (नॉन-मेडिकल) शिक्षक के ज्वाइन करने के महज छह घंटे के भीतर तबादला आदेश संशोधित कर दिए गए। शिक्षा विभाग की इस अजीबोगरीब कार्यप्रणाली ने स्थानीय जनता को हैरान कर दिया है और बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह अनोखा मामला सीनियर सेकेंडरी स्कूल रूणहकोठी क्लस्टर के तहत आने वाले राजकीय माध्यमिक विद्यालय सामरा में शुक्रवार को सामने आया। स्कूल पहुंचे टीजीटी शिक्षक ने सुबह लगभग 10 बजे अपने पद पर कार्यभार संभाला था। अभी उनके ज्वाइन किए छह घंटे ही बीते थे कि शाम करीब 4 बजे स्कूल प्रशासन को सूचना मिली कि उक्त शिक्षक के तबादला आदेशों को संशोधित (अमेंड) कर दिया गया है। 5 साल का इंतजार और कुछ ही घंटों में निराशा सामरा स्कूल के छात्र और अभिभावक पिछले करीब पांच वर्षों से टीजीटी (नॉन-मेडिकल) शिक्षक की नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। शिक्षक के आने से स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों में उम्मीद जगी थी कि अब विज्ञान (साइंस) विषय की नियमित पढ़ाई सुचारू रूप से हो सकेगी। लेकिन शिक्षा विभाग के इस त्वरित फैसले ने कुछ ही घंटों में उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिससे समूचे क्षेत्र में भारी निराशा है। पंचायत प्रधान ने जताई कड़ी नाराजगी ग्राम पंचायत रूणहकोठी की प्रधान इंदिरा ठाकुर ने इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भरमौर जैसे जनजातीय क्षेत्र पहले से ही स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि पांच साल बाद मिले शिक्षक को महज कुछ ही घंटों के भीतर राजनीतिक या प्रशासनिक रसूख के चलते हटा दिया जाता है, तो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के अलावा कुछ नहीं है। एसडीएम ने दिया जांच का आश्वासन इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह ने संज्ञान लेते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस तरह के आदेश जारी होना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि वाकई इतने कम समय में आदेश बदले गए हैं, तो वह इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जानकारी लेंगे और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाएंगे। उप निदेशक शिक्षा का विरोधाभासी रुख, झाड़ा पल्ला इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उप निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) चंबा, विकास महाजन का विरोधाभासी रवैया सामने आया। स्कूल प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि शिक्षक के तबादला आदेश संशोधित होने की जानकारी उप निदेशक कार्यालय से फोन के माध्यम से दी गई थी। लेकिन जब इस बाबत उप निदेशक विकास महाजन से सीधा संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी ही नहीं है। विभाग के इस दोहरे रवैये ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।