भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले वीरवार को प्रदेश भर की आशा वर्करों ने लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय के समक्ष विशाल प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण और न्यूनतम मासिक मानदेय 18,000 रुपए निर्धारित करना शामिल है। रैली के रूप में नारेबाजी करती हुई पहुंचीं हजारों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं का लंबे समय से शोषण किया जा रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ के मुख्य सचिव ने बताया कि कोरोना काल से लेकर सामान्य दिनों तक, हर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम प्रोत्साहन राशि पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सरकार उन्हें ‘मानदेय कर्मी’ मानकर न्यूनतम वेतन कानूनों के दायरे से बाहर रख रही है, जो कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। जिला कलेक्टर से मिला डेलीगेशन दोपहर बाद आशा कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर से मिला और मुख्यमंत्री के नाम एक 7 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इस प्रदर्शन के कारण कलेक्ट्रेट मार्ग पर करीब 2 घंटे तक यातायात बाधित रहा। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी बजट सत्र से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें