ऊना जिले के गगरेट उपमंडल स्थित नगर पंचायत गगरेट में बुधवार को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम सामने आए। सात सदस्यीय नगर पंचायत में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा अध्यक्ष पद का चुनाव हार गई। कांग्रेस ने अपनी रणनीति के दम पर यह बाजी पलटी। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर मतदान के बाद चार-चार मत बराबर रहे, जिसके बाद फैसला ड्रा ऑफ लॉट्स के जरिए हुआ। अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की मंजू ठाकुर विजयी घोषित हुईं, जबकि उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के विकास कालिया के पक्ष में ड्रा निकला। नगर पंचायत गगरेट की सात सदस्यीय परिषद में छह पार्षद भाजपा विचारधारा से संबंधित माने जा रहे थे। इसके विपरीत, कांग्रेस के पास केवल मंजू ठाकुर थीं। इस स्थिति में, अध्यक्ष पद पर भाजपा की जीत लगभग निश्चित मानी जा रही थी। हालांकि, चुनाव परिणाम ने भाजपा के भीतर की गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरियों को उजागर कर दिया। बीजेपी अपने पार्षदों को एकजुट नहीं रख पाई भाजपा की आंतरिक खींचतान और गुटबाजी के कारण पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट नहीं रख पाई। इस राजनीतिक असंतोष का फायदा उठाते हुए विधायक राकेश कालिया ने भाजपा खेमे के दो पार्षदों को अपने पक्ष में कर लिया। इससे भाजपा का आंकड़ा चार और कांग्रेस का तीन हो गया। उच्चतम न्यायालय द्वारा नगर निकायों में विधायकों के मतदान अधिकार बहाल किए जाने के बाद विधायक राकेश कालिया ने मतदान किया। उनके मत से कांग्रेस भी चार के आंकड़े पर पहुंच गई, जिससे मुकाबला बराबरी का हो गया। अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस से मंजू ठाकुर और भाजपा से बबीता कुमारी उम्मीदवार थीं। कांग्रेस से जनक और बीजेपी से विकास कालिया थे उम्मीदवार उपाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस ने जनक राज और भाजपा ने विकास कालिया को मैदान में उतारा था। मतदान के दौरान दोनों पक्षों को चार-चार मत प्राप्त हुए, जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने ड्रा ऑफ लॉट्स की प्रक्रिया अपनाई। अध्यक्ष पद के लिए निकले ड्रा में मंजू ठाकुर के नाम की पर्ची निकली और वे अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दी गईं। इसके बाद उपाध्यक्ष पद के लिए हुए ड्रा में भाजपा उम्मीदवार विकास कालिया विजयी रहे। परिणाम आते ही भाजपा में बवाल, नेताओं ने अपने ही नेतृत्व पर उठाए सवाल अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की जीत की घोषणा होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। विधायक राकेश कालिया के समर्थकों ने नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया। भाजपा खेमे में माहौल पूरी तरह बदल गया। भाजपा नेता चैतन्य शर्मा की अगुवाई में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अपने ही संगठन और नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई। चुनाव स्थल के बाहर भाजपा नेताओं ने गुटबाजी और संगठनात्मक विफलता को हार का कारण बताते हुए जमकर नारेबाजी की।

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