कांगड़ा जिले की धौलाधार पर्वत श्रृंखला में अब बिना पंजीकरण के ट्रैकिंग करना महंगा पड़ सकता है। ट्रैकर्स के फंसने, लापता होने और हादसों के बढ़ते मामलों के मद्देनजर, जिला मजिस्ट्रेट हेमराज बैरवा ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रशासन ने जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिले के 10 प्रमुख ट्रेकिंग रूटों पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 15 अक्टूबर, 2026 तक प्रभावी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट हेमराज बैरवा ने बताया कि मानसून में पहाड़ों पर भूस्खलन, घना कोहरा, अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और फिसलन भरे रास्तों के कारण ट्रेकिंग बेहद जोखिमपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार ट्रेकर्स प्रशासन को सूचित किए बिना या रूट की जानकारी साझा किए बिना निकल जाते हैं। ऐसे में उनके लापता होने पर खोज और बचाव अभियान लंबा और चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिससे बचाव दल की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) कांगड़ा ने धौलाधार श्रृंखला में 3600 मीटर से 4600 मीटर तक की ऊंचाई वाले 10 प्रमुख ट्रैकिंग रूटों की पहचान की है, जिन पर यह नियम लागू होगा। इन रूटों पर खतरा आपदा प्रबंधन चेक पोस्ट स्थापित किए जाएंगे इन सभी ट्रैकिंग मार्गों के शुरुआती बिंदुओं पर आपदा प्रबंधन चेक पोस्ट स्थापित किए जाएंगे। ये चेक पोस्ट रोजाना सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे। इन रूटों पर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति या समूह को चेक पोस्ट पर अपना व्यक्तिगत पंजीकरण कराना होगा। इसके साथ ही, उन्हें अपनी यात्रा योजना, संपर्क विवरण और वापसी का संभावित समय भी दर्ज कराना अनिवार्य होगा। होगी जेल और सख्त कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति या समूह बिना पंजीकरण के ट्रेकिंग पर जाता है, या निर्धारित रूट से भटकता है और किसी दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसे बचाने के लिए निजी बचाव टीमों की सहायता ली जाएगी। खोज और बचाव अभियान का जो भी खर्च आएगा, वह संबंधित व्यक्ति या समूह से वसूला जाएगा।आदेशों की अवहेलना करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।