जनजातीय जिला किन्नौर के पूह विकास खंड की ग्राम पंचायत रारंग में पांच दिवसीय राज्य स्तरीय ‘गुरु संज्ञास मेले’ का विधिवत और भव्य शुभारंभ हो गया है। 20 से 24 जून तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उपायुक्त (डीसी) किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर और मेला ध्वजारोहण के साथ किया। महायान बौद्ध संस्कृति के इस प्रमुख केंद्र में आयोजित हो रहे मेले के दौरान पांच भव्य सांस्कृतिक संध्याएं और विभिन्न पारंपरिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। युवा पीढ़ी अपनी बौद्ध संस्कृति पर गर्व करे: डॉ. अमित शर्मा समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने कहा कि मेले और त्योहार किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। उन्होंने स्थानीय युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध बौद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास पर गर्व महसूस करना चाहिए। आधुनिक और तनावपूर्ण जीवनशैली में बौद्ध धर्म के शांति और सद्भाव के संदेश पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक हैं। यह मेला गुरु पद्मसंभव को समर्पित है और रारंग की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर है।” उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से मेला समिति को हर संभव वित्तीय और प्रशासनिक सहायता देने का आश्वासन दिया, ताकि इस राज्य स्तरीय आयोजन को भविष्य में और भी भव्य रूप दिया जा सके। विश्व प्रसिद्ध है किन्नौर की समृद्ध संस्कृति डॉ. शर्मा ने किन्नौर के निवासियों की सराहना करते हुए कहा कि इस जनजातीय क्षेत्र के मेहनतकश लोग अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच मनोरंजन, आपसी प्रेम और भाईचारे को जिंदा रखने के लिए ऐसे उत्सवों का आयोजन करते हैं। यहां की समृद्ध संस्कृति और अनूठे रीति-रिवाज पूरी दुनिया में अपनी खास पहचान रखते हैं, जो समाज में एकजुटता और खुशहाली का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू करेंगे समापन मेला समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पांच दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। यह मेला न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस पांच दिवसीय भव्य मेले का आधिकारिक समापन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह के पहले दिन स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।