हिमाचल प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं को बेहतर और टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-3) के तहत करसोग क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण और पुनर्निर्माण आधुनिक एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से किया जा रहा है। करसोग क्षेत्र में लगभग 44.50 करोड़ रुपये की लागत से 4 प्रमुख सड़कों का पुनर्निर्माण हुआ है। इनमें खील-भगालू, खील-कुफरी माहूंनाग, चलोग-बगैला और केलोधार-स्यांज सड़कें शामिल हैं। इन परियोजनाओं से हजारों ग्रामीणों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम यातायात सुविधा मिल रही है। एफडीआर सड़क निर्माण की एक आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है। इसमें पुरानी और क्षतिग्रस्त सड़क की परतों को पूरी गहराई तक पुनः उपयोग में लाकर एक मजबूत आधार तैयार किया जाता है। इसके ऊपर नई सड़क बनाई जाती है, जिससे सड़क की मजबूती, गुणवत्ता और आयु में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह पारंपरिक मरम्मत पद्धति से अधिक प्रभावी मानी जाती है, क्योंकि यह सड़क की निचली परतों की कमजोरियों को भी दूर करती है। पहाड़ी क्षेत्रों में जहां बारिश और भौगोलिक परिस्थितियों का सड़कों पर अधिक प्रभाव पड़ता है, एफडीआर तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है। रखरखाव पर होने वाला खर्च भी कम इससे सड़कें लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनी रहती हैं और उनके रखरखाव पर होने वाला खर्च भी कम होता है।यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। पुरानी सड़क सामग्री का पुनः उपयोग होने से नई निर्माण सामग्री की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे निर्माण मलबे में भी कमी आती है। एफडीआर तकनीक से बनी सड़कें अधिक मजबूत लोक निर्माण विभाग मंडल करसोग के कार्यकारी अभियंता अजय राज गुप्ता ने बताया कि एफडीआर तकनीक से बनी सड़कें अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ हैं। इससे क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक बेहतर सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा। यह पहल प्रदेश सरकार की गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना निर्माण की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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