हिमाचल प्रदेश के मंडी में चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और 15 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने आदेशों में साफ कहा कि जुर्माना राशि जमा न करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। यह सजा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, कोर्ट नंबर-2 मंडी की जस्टिस गीतिका यादव ने सुनाई। मामला सदर तहसील के गुटकर स्थित श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस लिमिटेड कंपनी द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। कंपनी ने शारदानंद निवासी गांव बह (नगवाईं) औट के खिलाफ निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। लोन के भुगतान को दिया था चेक अदालत में शिकायत के अनुसार, आरोपी शारदानंद ने एक वाहन के वित्तपोषण के लिए कंपनी से 8 लाख 16 हजार 500 रुपए का लोन लिया था। वह समय पर लोन की किस्तें जमा करने में विफल रहा, जिससे बकाया राशि बढ़कर 10 हजार 80 हजार 798 रुपए हो गई। इसके बाद आरोपी ने भुगतान के लिए कंपनी को 10 लाख रुपए का चेक दिया। अकाउंट में पैसा नहीं होने पर चेक बाउंस जब कंपनी ने यह चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया, तो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को 15 दिन का नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की। हालांकि, निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद कंपनी ने अदालत का रुख किया। आरोप तय होने पर अदालत ने सजा सुनाई मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी के विरुद्ध चेक बाउंस का आरोप संदेह से परे सिद्ध हो गया है। इसी आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास और 15 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

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