हिमाचल के चक्कर स्थित मिल्क प्लांट में दूध संग्रहण से नाराज दुग्ध उत्पादकोंऔर व्यापारियों ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। करीब 100 दुग्ध उत्पादकों और किसानों ने मंगलवार को बल्ह के एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो 18 जून को चक्कर स्थित मिल्क प्लांट के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विधायक इंद्र सिंह गांधी ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। प्रतिदिन न्यूनतम 20 लीटर की शर्त लागू दुग्ध उत्पादकों का आरोप है कि चक्कर मिल्क प्लांट ने दूध खरीद के लिए प्रतिदिन न्यूनतम 20 लीटर की शर्त लागू कर दी है। इससे छोटे पशुपालक सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि क्षेत्र के अधिकांश पशुपालकों का दूध उत्पादन 20 लीटर से कम है, जिसके कारण उनका दूध प्लांट द्वारा नहीं खरीदा जा रहा। इस स्थिति में उन्हें अपना दूध कम कीमतों पर निजी स्तर पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने सप्ताह में एक दिन घोषित किए गए ‘मिल्क हॉलिडे’ का भी विरोध किया है। उनका तर्क है कि दूध का उत्पादन प्रतिदिन होता है और संग्रहण बंद रहने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। प्रशासन से मांगों पर जल्द कार्रवाई की अपील इसके अतिरिक्त, दुग्ध उत्पादकों ने दूध संग्रहण, भुगतान व्यवस्था, प्लांट की वास्तविक क्षमता, चिलिंग सुविधा और गुणवत्ता जांच प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। दुग्ध उत्पादकों ने प्रशासन से अपनी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो 18 जून का प्रस्तावित धरना एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।