हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर जारी केंद्र सरकार के आदेशों ने किसानों व बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में किसानों और बागवानों को खुले कंटेनरों में पेट्रोल-डीजल नहीं मिल रहा है, जिससे खेती व बागवानी से जुड़े काम बुरी तरह प्रभावित होने लगे हैं। कैनी और बोतल में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्ती के बाद पंप संचालक खुले में ईंधन नहीं दे रहे। इससे पावर स्प्रेयर, पावर टिलर, ग्रास कटर, वुड कटर, पानी के पंप, मिनी टिलर इत्यादि शो-पीस बन गए है। राज्य की आर्थिकी में 5500 करोड़ रुपए से ज्यादा का योगदान देने वाले सेब बगीचों में इन दिनों स्प्रे होती है, लेकिन उसके लिए पेट्रोल पंप संचालक ईंधर नहीं दे रहे। इससे बागवानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह, दूसरे कृषि उपकरणों के लिए भी पेट्रोल-डीजल नहीं मिल रहा। प्रदेश में इससे हाहाकार जैसी स्थिति बनने लगी है। केंद्र के आदेश भारी पड़ रहे: रमेश ठियोग के बागवान रमेश शर्मा ने बताया कि बागवान पहले ही मौसम की मार झेल रहे हैं। अब केंद्र सरकार के नए आदेश उनके लिए नई परेशानी बन गए हैं। उन्होंने कहा कि सेब बागानों में इस समय स्प्रे करना बेहद जरूरी है, लेकिन पेट्रोल नहीं मिलने के कारण वे स्प्रे का काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलों पर बीमारियों और कीटों का खतरा बढ़ सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आदेश लागू किए जा रहे: रचित इंडियन ऑयल सर्विस (आईओएस) के स्टेट कोऑर्डिनेटर रचित अग्रवाल ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार तथा पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन’ (PESO) द्वारा प्रमाणित कंटेनरों में ही पेट्रोल-डीजल दिया जा सकता है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए तेल कंपनियां इन्हीं नियमों का पालन कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार खुले कंटेनरों में ईंधन देने की अनुमति देती है तो तेल कंपनियों को ऐसा करने में कोई आपत्ति नहीं होगी। माकपा ने जताई चिंता माकपा नेता संजय चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगाई गई नई पाबंदियों से प्रदेश के किसानों और बागवानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि किसान और बागवान पावर टिलर, स्प्रे मशीन, घास काटने की मशीन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग उपकरण पेट्रोल-डीजल से चलाते हैं, लेकिन अब बोतल और कैन में ईंधन नहीं मिलने से खेती-बागवानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस व्यवस्था में तत्काल राहत देने और किसानों-बागवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की मांग की।