बौद्ध धर्म गुरु क्यबजे कुन्देलिंग तच्छांग रिन्पोछे हिमाचल के मनाली पहुंच गए हैं। वे 15 जून को मनाली बौद्ध मठ में अनुयायियों को दीर्घायु अभिषेक प्रदान करेंगे। बौद्ध अनुयायियों ने मनाली मोनास्ट्री में उनका पारंपरिक रूप से स्वागत किया। शनिवार को सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों ने रिन्पोछे का मनाली पहुंचने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर स्वागत किया। बारिश के बावजूद, लोग सुबह से ही उनके दर्शन के लिए इंतजार कर रहे थे। दोपहर बाद जैसे ही धर्मगुरु मनाली स्थित बौद्ध मठ पहुंचे, आशीर्वाद लेने के लिए भीड़ एकत्रित हो गई। बुद्धिस्ट सोसाइटी मनाली के संरक्षक रवि ठाकुर ने बताया कि धर्म गुरु क्यबजे कुन्देलिंग तच्छांग रिन्पोछे मनाली पहुंच चुके हैं और वे 15 जून सोमवार को बौद्ध मठ में अनुयायियों को दीर्घायु अभिषेक प्रदान करेंगे। उन्होंने सभी से अधिक संख्या में मनाली बौद्ध मठ पहुंचकर बौद्ध धर्म की शिक्षाओं और दीर्घायु अभिषेक का लाभ उठाने की अपील की है। क्यबजे कुन्देलिंग तच्छांग रिन्पोछे तिब्बती बौद्ध धर्म के एक उच्च सम्मानित लामा और आध्यात्मिक गुरु हैं। उन्हें दलाई लामा द्वारा 12वें कुंडलिंग तात्सक रिनपोचे के 13वें पुनर्जन्म के रूप में मान्यता प्राप्त है। ल्हासा, तिब्बत में हुआ है रिनपोछे का जन्म रिनपोछे का जन्म 1983 में ल्हासा, तिब्बत में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में दक्षिण भारत के ड्रेपुंग मठ में प्रवेश लिया। उन्होंने 2013 में अपनी ‘गेशे’ (बौद्ध दर्शन में डॉक्टरेट के समकक्ष) की डिग्री पूरी की और बाद में ग्युदमेड मठ में तांत्रिक शिक्षाएं प्राप्त कीं। दलाई लामा के वरिष्ठ शिक्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनके पिछले अवतारों ने तिब्बत के रीजेंट और दलाई लामा के वरिष्ठ शिक्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे विभिन्न देशों में भ्रमण कर बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों, करुणा, आंतरिक शांति और ध्यान के महत्व पर शिक्षा देते हैं।उनका हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मनाली क्षेत्र से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने पूर्व में मनाली के वॉन नगारी मठ में अनुयायियों और भिक्षुओं को दीक्षा और महत्वपूर्ण उपदेश दिए हैं।

Spread the love