धर्मशाला नगर निगम के वित्तीय खातों के ऑडिट में बड़ी वित्तीय अनियमितता और लापरवाही सामने आई है। वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, निगम ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा प्रबंधन से जुड़े ठेकेदारों को नियमों का उल्लंघन करते हुए लाखों रुपए का अधिक भुगतान किया है। जॉइंट कमिश्नर ने इस मामले में दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की बात कही है। ऑडिट विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि नगर निगम ने शहर में घर-घर कूड़ा कचरा संग्रहण और गलियों की साफ-सफाई का जिम्मा संभालने वाले ठेकेदार को नियम विरुद्ध 7.31 लाख रुपए का अधिक भुगतान किया। यह राशि निर्धारित अनुबंध से अधिक थी। इसी तरह, सॉलिड वेस्ट और लिगेसी वेस्ट के निपटारे का काम कर रही पंचकुला की मैसर्स सन्तन लाइफ कंपनी को भी निगम अधिकारियों ने तय नियमों से हटकर 4.05 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया। इन भुगतानों पर ऑडिट टीम ने गंभीर आपत्ति जताई है। निजी बैंकों में खोले गए प्रॉपर्टी टैक्स के अकाउंट निगम ने कूड़ा कचरा संग्रहण और गृहकर (प्रॉपर्टी टैक्स) से होने वाली आय को रखने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक के बचत खाते के बजाय आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड बैंक में चालू खाते खोल दिए। नियमों के अनुसार, चालू खातों में जमा राशि पर बैंक कोई ब्याज नहीं देता है। इस कारण आईसीआईसीआई बैंक के कूड़ा संग्रहण खाते में जमा 11.40 लाख रुपए और इंडसइंड बैंक के गृहकर खाते में रही बड़ी राशि पर निगम को कोई ब्याज नहीं मिला। इससे नगर निगम को सीधा वित्तीय नुकसान हुआ है। ऑडिट टीम ने मुख्य रोकड़ बही (कैश बुक) और बैंक खातों के रिकॉर्ड में भी कई विसंगतियां पाई हैं। हिमाचल प्रदेश वित्त नियम 1971 के नियमों को दरकिनार करते हुए निगम ने बैंक खातों का मिलान ही नहीं किया, जिसके चलते 31 मार्च 2025 तक रोकड़ बही और बैंक पासबुक के अंतिम शेष में 165.29 लाख रुपए का एक बड़ा अंतर पाया गया है। साथ ही करीब 1.34 करोड़ रुपए के चेक रोकड़ बही से जारी तो कर दिए गए लेकिन बैंक से उनका भुगतान ही नहीं हुआ। ऑडिट के दौरान सामने आई 13 अनियमितताएं ऑडिट के दौरान सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली कुल 13 गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें गृहकर, दुकानों के किराए और मोबाइल टावर शुल्क की 956.19 लाख रुपए की लंबित वसूली तथा स्ट्रीट लाइट के रख-रखाव के 80.78 लाख रुपए के रिकॉर्ड गायब होना शामिल है। जब ऑडिट टीम ने अंकेक्षण अधियाचना संख्या 412 के जरिए इन गड़बड़ियों पर जवाब मांगा, तो निगम प्रशासन ने सिर्फ इतना कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जल्द ही रोकड़ बही का बैंक खातों से मिलान कर रिकॉर्ड दुरुस्त कर लिया जाएगा। जॉइंट कमिश्नर बोले- आरोपियों पर होगी कार्रवाई इस पूरे मामले पर नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर सुरिंदर कुमार ने दैनिक भास्कर को बताया कि ऑडिट रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और इसके बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकारी धन की अनदेखी और वित्तीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और अनियमितता बरतने वाले दोषियों के विरुद्ध विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।