हिमाचल प्रदेश में आज अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्र बंद है। इनमें कार्यरत्त आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर शिमला में सीटू के बैनर तले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रही हैं। इससे शिमला की लाइफ लाइन कहे जाने वाले सर्कुलर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है। सचिवालय के बाहर बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर के पहुंचने के बाद ट्रैफिक वन-वे चलाया जा रहा है। इससे सड़क पर दोनों और वाहनों की लंबी लंबी लाइनें लग गई है। इस प्रदर्शन में किन्नौर, सिरमौर, चंबा, लाहौल स्पीति समेत राज्य के सभी जिलों से आंगनवाड़ी वर्कर व हेल्पर पहुंचीं है। राज्य में लगभग 37 हजार आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर सेवारत्त है, जोकि लंबे समय से सरकार से विभिन्न मांगें उठाती रही है। राज्य में सेवारत्त आंगनवाड़ी वर्कर को लगभग 11,500 रुपए और हेल्पर को लगभग 8300 रुपए मानदेय मिलता है। यानी इन्हें न्यूनतम मानदेय भी नहीं दिया जा रहा। आंगनवाड़ी वर्कर के प्रमुख कार्य राज्य में आंगनवाड़ी वर्कर 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों का पंजीकरण व निगरानी, बच्चों का वजन व पोषण स्तर की नियमित जांच, कुपोषित बच्चों की पहचान, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सलाह, टीकाकरण कार्यक्रमों में स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय, 3 से 6 वर्ष के बच्चों को प्री-स्कूल (स्कूल पूर्व) शिक्षा देना, पोषण ट्रैकर, अन्य सरकारी रिकॉर्ड का रखरखाव, विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों और जनकल्याण कार्यक्रमों में सहयोग जैसे प्रमुख काम करती है। इसी तरह, आंगनवाड़ी हेल्पर (सहायिका) केंद्र की साफ-सफाई व रखरखाव, बच्चों व महिलाओं के लिए पूरक पोषण आहार तैयार व वितरित करने, छोटे बच्चों की देखभाल में कार्यकर्ता की सहायता, केंद्र में आयोजित गतिविधियों व कार्यक्रमों में सहयोग देने, बच्चों को केंद्र तक लाने और अभिभावकों से संपर्क बनाने में मदद करती है।

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