नाबालिग लड़की को कथित तौर पर डराने-धमकाने और बयान बदलने के लिए दबाव डालने के आरोपों के बाद निलंबित किए गए 4 पुलिसकर्मियों के मामले में विभागीय जांच तेज हो गई है। इस मामले की जांच एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जो घटना के सभी पहलुओं की कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से पड़ताल कर रहे हैं। यह मामला चुराह उपमंडल के एक व्यक्ति की शिकायत से जुड़ा है, जिसने 7 अप्रैल, 2026 को महिला थाना चंबा में अपनी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि क्षेत्र का एक युवक उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। पुलिस ने बीएनएस और बाल संरक्षण प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान, पुलिस ने साइबर सेल की मदद से मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए। इन साक्ष्यों के आधार पर युवती और आरोपी युवक का पता चेन्नई में चला। एक विशेष पुलिस टीम चेन्नई पहुंची, कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और दोनों को चंबा वापस ले आई। नाबालिग को उसके परिवार को सौंप दिया गया, जबकि आरोपी युवक को नियमानुसार हिरासत में लिया गया। हालांकि, बाद में यह आरोप सामने आए कि जांच टीम में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों ने नाबालिग को प्रभावित करने और उसके बयान बदलने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया। इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए, पुलिस अधीक्षक चंबा ने तत्काल प्रभाव से 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर पुलिस लाइन में भेज दिया। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही: एसपी पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि विभागीय जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद, सेवा नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।