स्मार्ट सिटी धर्मशाला में भ्रष्टाचार और बदइंतजामी का एक बड़ा मामला सामने आया है। बस स्टैंड से लेकर शिक्षा बोर्ड तक करोड़ों की लागत से बनी ‘स्मार्ट रोड’ पहली प्री-मानसून बरसात का बोझ भी नहीं झेल पाई। मानसून की दस्तक से ठीक पहले धर्मशाला सचिवालय के मुख्यद्वार और एसपी कार्यालय जैसे वीआईपी इलाके के सामने सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिसने प्रशासन के विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है। जहां एक ओर संबंधित विभाग के बड़े अधिकारी इस बदहाली पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं, वहीं एसडीओ के बयानों से साफ है कि प्रशासन अब गेंद निर्माण कंपनी के पाले में डाल रहा है। अब देखना यह होगा कि 30 जून की समयसीमा के भीतर जनता को इस खस्ताहाल सड़क से निजात मिलती है या मानसून की भारी बारिश में यह वीआईपी रोड किसी बड़े हादसे का सबब बनती है। 25.17 करोड़ की भारी-भरकम लागत, पर वीआईपी मार्ग पर सिर्फ हिचकोले अधूरी सड़क, पूरा भुगतान: ब्लैकलिस्ट के बजाय पुरानी कंपनी सिर्फ टर्मिनेट
इस पूरे प्रोजेक्ट में वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही का एक बड़ा खेल सामने आया है। बिना काम पूरा किए गए कंपनी को फुल एंड फाइनल पेमेंट कर दिया गया बाद में उसकों ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। अधिकारियों के इस खेल को तो इन पॉइंट से समझें ब्लैकलिस्ट करने के बजाय महज टर्मिनेट किया: साल 2019 में इसके निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था। इसका जिम्मा आकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया। लेकिन कंपनी काम अधर में ही छोड़कर चली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बावजूद कंपनी को फुल एंड फाइनल पेमेंट कर दी। इसके बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की बजाय महज टर्मिनेट​ किया गया। जो 18करोड़ में तैयार होनी थी वह 25 करोड़ में हुई: बाद में नए सिरे से इस स्मार्ट रोड का बजट बढ़ाकर दोबारा काम शुरू किया गया, जिस पर अब तक 25.17 करोड़ रुपए फूंके जा चुके हैं। यानी जो सड़क 18 करोड़ रुपए में बनकर तैयार होनी थी, उसकी लागत बढ़कर 25 करोड़ के पार पहुंच गई, जमीनी हकीकत: करोड़ों रुपए फूंके जाने के बाद भी लेकिन जनता को सहूलियत के नाम पर सिर्फ गड्ढे मिले। पहली बारिश में सड़क धंस गई। धंसी हुई सड़क और अधिकारियों की लेत-लतीफी ने इन तमाम हाईटेक दावों पर पानी फेर दिया है।
कागजों में ‘हाईटेक’ सुविधाएं, धरातल पर सिर्फ गड्ढे “कंपनी की है जवाबदेही, 30 जून तक का दिया है समय”— स्मार्ट सिटी प्रबंधन स्मार्ट सिटी एसडीओ केवल शर्मा,का कहना है कि सड़क जहां पर भी धंसी है, वहां से जल शक्ति विभाग की पेयजल और सीवरेज लाइनें बिछाई गई हैं। इस हिस्से को रिपेयर करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की है। वर्तमान में बिटुमेन प्लांट बंद होने के कारण मरम्मत के काम में थोड़ी देरी हुई है। सड़क निर्माण की अन्य तकनीकी खामियों को भी 30 जून 2026 से पहले दूर करने के लिए कंपनी को अंतिम नोटिस जारी किया जा चुका है।

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