धर्मशाला नगर निगम चुनाव में कम मतदान के आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। इसे देश की आंतरिक सुरक्षा और संवेदनशीलता से भी जोड़ा जा रहा है। चुनाव में उम्मीद से बेहद कम वोटिंग होने के बाद अब क्षेत्र में मतदाता सूचियों के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की मांग उठने लगी है। स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि बाहरी प्रवासियों और निर्वासित तिब्बतियों के नाम पर बनाई गई संदिग्ध वोटर लिस्ट की गहन जांच आवश्यक है। धर्मशाला तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और तिब्बत की निर्वासित सरकार (सीटीए) का वैश्विक मुख्यालय है, जो इसे एक संवेदनशील क्षेत्र बनाता है। वार्ड नंबर 3 में 1487 मतों में सिर्फ 630 वोट कास्ट नगर निगम के वार्ड नंबर 3 के आंकड़े इस स्थिति को दर्शाते हैं। इस वार्ड में कुल 1487 पंजीकृत मतदाताओं के मुकाबले महज 630 वोट ही डाले गए। इसके चलते यहां का कुल मतदान प्रतिशत गिरकर सिर्फ 42.35 फीसदी पर सिमट गया। 128 वोट बिहार से आए प्रवासी श्रमिकों के नाम पर दर्ज नाम न उजागर करने की शर्त पर क्षेत्र के एक प्रमुख राजनीतिक दल के पदाधिकारी ने कम मतदान के पीछे के कारणों को उजागर किया है। उनके अनुसार वार्ड की मतदाता सूची में करीब 128 वोट बिहार से आए प्रवासी श्रमिकों के नाम पर दर्ज थे, लेकिन मतदान के दिन इनमें से केवल एक ही श्रमिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। तिब्बती समुदाय के 225 लोग ही बूथ पहुंचे इसी तरह, सूची में शामिल निर्वासित तिब्बती समुदाय के 700 मतदाताओं में से मात्र 225 लोग ही पोलिंग बूथ तक पहुंचे। इन मतदान समीकरणों ने पूर्व के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए अपनाई गई रणनीति को उजागर किया है। पुराने समीकरण बदल गए इस रणनीति के तहत प्रवासी श्रमिकों और अन्य बाहरी लोगों के फर्जी पतों पर आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज तैयार करवाए गए थे। लेकिन इस बार वार्ड आरक्षित होने के कारण पुराने समीकरण बदल गए, और जो मतदाता केवल कागजों में दर्ज थे या किसी खास उद्देश्य से जोड़े गए थे, वे मतदान केंद्रों पर अनुपस्थित रहे।