जिला मंडी में मुस्लिम समुदाय ने वीरवार को ईद-उल-अजहा का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया। इस अवसर पर मंगवाई और जेलरोड स्थित मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा अमन-चैन के लिए दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। मुस्लिम वेलफेयर कमेटी मण्डी के सदस्य इकबाल अली और मिनाम खान ने बताया कि ईद-उल-अजहा को बलिदान, त्याग और समर्पण का पर्व माना जाता है। यह त्योहार इंसानियत, सेवा और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं और खुशियां साझा करते हैं। ईद-उल-अजहा इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक उन्होंने यह भी बताया कि ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस पर्व का इतिहास हजरत इब्राहिम की उस महान कुर्बानी से जुड़ा है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने प्रिय पुत्र की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। उनकी आस्था और समर्पण से प्रसन्न होकर अल्लाह ने उनके पुत्र को सुरक्षित रखा, और उसी घटना की याद में यह पर्व मनाया जाता है। ईद-उल-अजहा का संदेश केवल कुर्बानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, एकता, इंसानियत और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का भी प्रतीक है। जरूरतमंदों की सहायता कर सामाजिक एकजुटता का दिया परिचय पर्व के अवसर पर लोगों ने जरूरतमंदों की सहायता कर सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया। पूरे मंडी शहर में ईद को लेकर खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह नजर आया, और लोगों ने पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाकर खुशियां बांटी।