केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष (सिक्योंग) पेंपा सेरिंग ने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह चीन के कड़े विरोध और आपत्तियों को दरकिनार करते हुए हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित किया गया। इस दौरान तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा विशेष रूप से उपस्थित रहे। पेंपा सेरिंग को पद और गोपनीयता की शपथ तिब्बती मुख्य न्याय आयुक्त येशी वांगमो ने दिलाई। समारोह धर्मशाला के प्रसिद्ध थेकचेन चोइलिंग त्सुगलाखांग (मुख्य तिब्बती मंदिर) में 17वीं कशाग (कैबिनेट) के तहत आयोजित किया गया था। समारोह की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि बीजिंग की नाराजगी के बावजूद दुनिया भर के कई राजनयिक और सांसद बड़ी संख्या में धर्मशाला पहुंचे। वैश्विक पर्यवेक्षकों ने इसे तिब्बत के मुद्दे को दबाने की चीन की कोशिशों के खिलाफ एक मजबूत संदेश बताया। सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने समारोह में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया और वैश्विक समर्थन पर प्रकाश डाला। मंच पर मौजूद प्रमुख राजनयिकों में ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल शामिल था। इसमें यूके संसद में तिब्बत के लिए सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG) के अध्यक्ष क्रिस लॉ, पूर्व ब्रिटिश मंत्री केरी मैक्कार्थी, ब्रिटिश संसद की विदेश मामलों की समिति की पूर्व अध्यक्ष एलीसिया एलेक्जेंड्रा मार्था कर्न्स और सांसद सुवेरा बेनेडिक्टा हॉबहाउस उपस्थित थे। 300 प्रतिनिधियों ने की शिरकत अरुणाचल प्रदेश के सांसद और तिब्बत के लिए सर्वदलीय संसदीय मंच के सह-संयोजक तापीर गाओ और राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार शामिल हुए। वहीं अमेरिकी सरकार का प्रतिनिधित्व नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारी अजय दयाल ने किया। इसके अलावा एमोरी यूनिवर्सिटी के करुणा केंद्र के प्रमुख गेशे लोबसांग तेनज़िन नेगी के नेतृत्व में 300 प्रतिनिधि भी शामिल हुए। ‘मिडल वे पॉलिसी’ पर कायम रहेगा तिब्बत; चीन के प्रोपेगैंडा को देंगे जवाब
अपने उद्घाटन भाषण में सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने कहा कि वर्तमान में चीनी सरकार की नीतियां दमनकारी हैं और बातचीत के लिए बेहद कम जगह बची है। इसके बावजूद तिब्बती प्रशासन दलाई लामा द्वारा परिकल्पित ‘मिडल वे पॉलिसी’ (मध्यम मार्ग नीति) पर दृढ़ रहेगा, जो अहिंसा और संवाद के जरिए इस संघर्ष का स्थायी समाधान ढूंढने की वकालत करती है।