हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही सूबे की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। सोमवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिमला में राजभवन जाकर महामहिम राज्यपाल से मुलाकात की। भाजपा ने कांग्रेस नीत राज्य सरकार पर लोकतंत्र, संविधान और चुनावी निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए एक विरोध-ज्ञापन सौंपा। भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में चुनावी आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के बावजूद सुक्खू सरकार लगातार ऐसे नीतिगत और लोकलुभावन फैसले ले रही है, जिनका सीधा असर मतदाताओं, महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ रहा है। पार्टी ने इसे चुनावी प्रक्रिया को अनुचित रूप से प्रभावित करने और प्रशासनिक मशीनरी का खुला दुरुपयोग करार दिया है। 22 मई की कैबिनेट बैठक को बनाया मुख्य मुद्दा राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में भाजपा ने पिछले दिनों 22 मई 2026 को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों पर तीखा ऐतराज जताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने सुनियोजित रणनीति के तहत ऐन चुनावों के बीच ये लोकलुभावन निर्णय लिए ताकि मतदाताओं को लुभाकर राजनीतिक लाभ हासिल किया जा सके। भाजपा के अनुसार, ये सभी कदम सीधे तौर पर वोट बैंक को प्रभावित करने के मकसद से उठाए गए हैं। भाजपा ने इन बड़े फैसलों पर जताई आपत्ति ₹1500 इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना: इस योजना के नियमों में किए गए हालिया बदलाव। बंपर भर्तियां: 2215 नए पदों पर भर्ती और 1500 शिक्षकों की नियुक्ति को दी गई मंजूरी। भत्ते और सेवानिवृत्ति: सरकारी कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि और प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का फैसला। प्रशासनिक बदलाव: नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की घोषणा। नियमों में बदलाव की तैयारी पर साधा निशाना भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अवगत कराया कि सरकार अब बैकडोर से चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनावों से संबंधित नियमों तथा अधिसूचनाओं में बदलाव करने की फिराक में है। पार्टी ने इसे जनादेश और संविधान का अपमान बताते हुए कहा कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों को बदलना पूरी तरह से असंवैधानिक है। ज्ञापन के अंत में भाजपा ने राज्य सरकार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों पर अनुचित प्रशासनिक दबाव बनाने और चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि प्रदेश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर होने से बचाया जा सके और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव संपन्न हो सकें।

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