देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों को मुफ्त इलाज तो मिल रहा है, लेकिन भुगतान में देरी के कारण पीजीआई को करोड़ों रुपये का इंतजार करना पड़ रहा है। हाल ही में सामने आई आडिट रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक 25.61 करोड़ रुपये के 4579 क्लेम लंबित थे। इनमें से पंजाब और जम्मू-कश्मीर ने 16.59 करोड़ रुपये के 2973 क्लेम खारिज कर दिए। पीजीआई और नेशनल हेल्थ एजेंसी के बीच हुए समझौते के अनुसार इलाज का भुगतान 30 दिनों के भीतर होना था, लेकिन कई मामलों में प्रक्रिया महीनों तक अटकी रही। आयुष्मान काउंटर तक नहीं पहुंचे पीजीआई प्रशासन के अनुसार आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले कई मरीज अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सीधे घर चले गए और निर्धारित आयुष्मान काउंटर तक नहीं पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डिस्चार्ज प्रक्रिया के दौरान मरीजों का अंतिम सत्यापन और जरूरी दस्तावेज अपडेट नहीं हो पाए। इसके चलते मरीजों के उपचार से जुड़े रिकॉर्ड बाद में अलग-अलग विभागों से जुटाने पड़े, जिससे क्लेम दाखिल करने में काफी देरी हुई। कई मामलों में तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज पूरे नहीं हो सके और क्लेम लंबित रह गए, जबकि कुछ दावे संबंधित स्टेट हेल्थ एजेंसियों ने तकनीकी कारणों से खारिज भी कर दिए। पहले की प्रक्रिया में मरीजों के डिस्चार्ज के समय रियल टाइम सत्यापन की व्यवस्था मजबूत नहीं थी। इसी कमी को दूर करने के लिए अब संस्थान में टीएमएस 2.0 सिस्टम लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का डिस्चार्ज के समय बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। मरीज के अस्पताल से छुट्टी लेने से पहले उसकी पहचान, उपचार का रिकॉर्ड और योजना से संबंधित सभी दस्तावेज ऑनलाइन सिस्टम में तुरंत अपडेट किए जाएंगे। भुगतान में लगातार देरी आडिट रिपोर्ट में सामने आया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पीजीआई द्वारा मरीजों के इलाज के बाद भेजे गए क्लेम का भुगतान तय समय सीमा के भीतर नहीं किया गया। पीजीआई और नेशनल हेल्थ एजेंसी के बीच हुए समझौते के अनुसार क्लेम राशि 30 दिनों के भीतर जारी होनी चाहिए थी, लेकिन कई मामलों में भुगतान महीनों तक लंबित रहा। इससे संस्थान पर आर्थिक दबाव बढ़ा और करोड़ों रुपये लंबे समय तक फंसे रहे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से इलाज से जुड़ी वित्तीय प्रक्रिया प्रभावित हुई। समय पर क्लेम फाइल नहीं होने की समस्या पीजीआई प्रशासन के मुताबिक कई मरीज इलाज पूरा होने के बाद सीधे वार्ड से डिस्चार्ज हो गए और आयुष्मान काउंटर तक नहीं पहुंचे। इसके कारण मरीजों के दस्तावेज, पहचान सत्यापन और उपचार संबंधी रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं हो सके। बाद में अलग-अलग विभागों से रिकॉर्ड जुटाने में देरी हुई, जिससे कई क्लेम निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं किए जा सके। आडिट में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में तकनीकी और दस्तावेजी कमियों के कारण क्लेम प्रक्रिया अधूरी रह गई। पंजाब और जम्मू-कश्मीर के क्लेम रिजेक्ट 31 मार्च 2025 तक लंबित 4579 क्लेम में से पंजाब और जम्मू-कश्मीर की स्टेट हेल्थ एजेंसियों ने 16.59 करोड़ रुपये के 2973 क्लेम खारिज कर दिए। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश क्लेम दस्तावेजों में कमी, सत्यापन में देरी और निर्धारित प्रक्रिया पूरी न होने के कारण रिजेक्ट हुए। इससे पीजीआई को करोड़ों रुपये के भुगतान का इंतजार करना पड़ा। संस्थान का कहना है कि कई दावे अभी भी संबंधित एजेंसियों के पास पुनर्विचार के लिए लंबित हैं। आडिट में यह भी सामने आया कि मरीजों के डिस्चार्ज के समय सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित नहीं थी। कई मामलों में लाभार्थियों का अंतिम बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाया और जरूरी दस्तावेज तुरंत ऑनलाइन अपलोड नहीं किए गए। इससे बाद में रिकॉर्ड मिलान और क्लेम सत्यापन में परेशानी आई। अस्पताल प्रशासन ने माना कि पुरानी व्यवस्था में रियल टाइम मॉनिटरिंग की कमी थी, जिसके कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई। टीएमएस 2.0 से सुधरेगी व्यवस्था इन खामियों को दूर करने के लिए पीजीआई ने अब टीएमएस 2.0 सिस्टम लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का डिस्चार्ज के समय बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। मरीज के अस्पताल से छुट्टी लेने से पहले उसके उपचार, पहचान और योजना से जुड़े सभी दस्तावेज ऑनलाइन सिस्टम में अपडेट किए जाएंगे। इससे क्लेम तुरंत जनरेट होंगे और समय पर दाखिल किए जा सकेंगे। संस्थान का कहना है कि टीएमएस 2.0 लागू होने के बाद देर से क्लेम फाइल होने और दस्तावेजी त्रुटियों की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी। फिलहाल पंजाब और जम्मू-कश्मीर के समक्ष लंबित क्लेम संबंधित स्टेट हेल्थ एजेंसियों के विचाराधीन हैं, हालांकि अंतिम भुगतान अभी बाकी है। योजना में भी फंसे 4 करोड़ से ज्यादा पंजाब और जम्मू-कश्मीर के अलावा हिमाचल सरकार पर भी पीजीआइ का करोड़ों रुपये बकाया है। हिमाचल सरकार की हिमकेयर योजना के तहत करीब 4.02 करोड़ रुपये लंबित हैं। यह राशि 657 मरीजों के इलाज से जुड़ी है, जिसका भुगतान तय समय सीमा के बावजूद नहीं किया गया। पीजीआई और हिमाचल सरकार के बीच फरवरी 2024 में समझौता हुआ था, जिसके तहत हिमकेयर मरीजों को कैशलेस इलाज दिया जाना था। दावा राशि 30 दिनों के भीतर जारी की जानी थी। वर्ष 2024-25 में पीजीआई ने कुल 34.65 करोड़ रुपये के दावे भेजे, जिनमें से 27.42 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। बाकी राशि लंबे समय से लंबित है।