धर्मशाला नगर निगम चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी अब कानूनी लड़ाई में बदल गई है। हिमाचल कांग्रेस के महासचिव और पूर्व मेयर देवेंद्र सिंह जग्गी ने भाजपा नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। जग्गी ने यह कदम ठाकुर द्वारा उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के जवाब में उठाया है। इस कानूनी कार्रवाई ने चुनावी माहौल में हलचल पैदा कर दी है, जिससे दोनों प्रमुख दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होने की उम्मीद है। विवाद की जड़ बीते गुरुवार को हुई बिक्रम ठाकुर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस है। इसमें पूर्व मंत्री ने देवेंद्र जग्गी पर नगर निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। ठाकुर ने दावा किया था कि जग्गी के कार्यकाल के दौरान हुए कथित घोटालों से सरकारी खजाने को लगभग 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगा है। भाजपा नेता ने इसे चुनावी मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए थे। जग्गी का पलटवार: “छवि बिगाड़ने की राजनीतिक साजिश” इन आरोपों को देवेंद्र जग्गी ने सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है। अधिवक्ता जितेंद्र शर्मा के माध्यम से भेजे गए नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जग्गी एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं और वे मेयर व डिप्टी मेयर जैसे गरिमामयी पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। नोटिस के अनुसार, चुनाव के ठीक पहले इस तरह के निराधार आरोप केवल उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुँचाने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। 1 करोड़ का हर्जाना और आपराधिक मुकदमे की चेतावनी भेजे गए नोटिस में देवेंद्र जग्गी ने 1 करोड़ रुपये की सिविल मानहानि के मुआवजे की मांग की है। साथ ही, पूर्व मंत्री को चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से और लिखित में बिना शर्त माफी नहीं मांगी, तो उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 और 357 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जग्गी ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी बेदाग छवि से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। जनता में छवि गिराने को दिए बयान देवेंद्र जग्गी के अधिवक्ता जितेंद्र शर्मा ने कहा कि उनके मुवक्किल की छवि को जनता की नजरों में गिराने के लिए तथ्यों से परे जाकर बयानबाजी की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आलोचना का स्वागत है, लेकिन व्यक्तिगत चरित्र हनन और बिना सबूतों के भ्रष्टाचार के आरोप लगाना कानूनन अपराध है। अब देखना यह होगा कि पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर इस अल्टीमेटम का क्या जवाब देते हैं और चुनाव के नतीजों पर इस कानूनी लड़ाई का क्या असर पड़ता है।