हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस के महासचिव और राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह सक्रिय होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि, यह गिरोह कांगड़ा और मंडी जिलों के युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर म्यांमार के टॉर्चर कैंपों में भेज रहा था। धर्मशाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदेश कांग्रेस महासचिव देवेंद्र जग्गी और राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने आरोप लगाया कि, धर्मशाला विधायक कार्यालय के पास एक कथित रोजगार मेले के जरिए युवाओं को फंसाया गया। जोगिंद्रनगर के पीड़ित प्रिंस कुमार ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें उसने बंधक बनाए जाने और अपनी आंखों के सामने एक रूसी लड़की की हत्या होते देखने की बात कही। प्रिंस कुमार के अनुसार, इस जालसाजी की शुरुआत मई 2025 में धर्मशाला के दाड़ी में लगे एक रोजगार मेले से हुई थी। वहां उसकी मुलाकात हारचक्कियां निवासी एजेंट वरयाम सिंह से हुई। एजेंट ने उसे मोहाली स्थित अपने कार्यालय बुलाया और कागजी कार्रवाई के नाम पर पैसे लिए। थाईलैंड में युवक से वसूले गए 70 हजार 500 रुपए प्रिंस को थाईलैंड में सेल्समैन की नौकरी का झांसा दिया गया और उससे कुल 70 हजार 500 रुपए वसूले गए। 8 जुलाई को प्रिंस अपने दोस्त साहिल के साथ बैंकॉक पहुंचा। वहां से उन्हें एक काली गाड़ी में 550 किलोमीटर दूर ले जाया गया और जंगल और नदी के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार की सीमा में दाखिल कराया गया। राज्यसभा सांसद ने बताया कि, म्यांमार पहुंचने पर कंपनी के गेट पर उनका मेडिकल टेस्ट हुआ। चीनी मूल के बॉस और कंपनी के एचआर ने उन पर पांच लाख रुपए की फिरौती देने या जबरन काम करने का दबाव डाला। प्रिंस ने बताया कि जान से मारने की धमकियों के बीच उनसे जबरन कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करवाए गए। उसने अपनी आंखों के सामने चीनी माफिया द्वारा एक रूसी लड़की की बेरहमी से हत्या होते भी देखा। सैन्य अभियान में कराया गया युवाओं को मुक्त राज्यसभा सांसद ने बताया कि, एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया, जिस दौरान प्रिंस और अन्य युवाओं को उस नरक से मुक्त कराया गया। सेना के रेस्क्यू के बाद उन्हें मेवाडी के एक स्पोर्ट्स हॉल में रखा गया और अंततः भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप से 18 नवंबर 2025 को उनकी वतन वापसी संभव हो सकी। इस हत्याकांड के बाद म्यांमार की सेना ने इलाके में दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने प्रिंस से डेढ़ दिनों तक गहन पूछताछ की, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह की गंभीरता का पता चलता है। धर्मशाला पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट फिलहाल, धर्मशाला पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं, जिसमें मानव तस्करी, संगठित अपराध और धोखाधड़ी शामिल है, के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने आईटी एक्ट, इमिग्रेशन एक्ट और पासपोर्ट एक्ट की धाराओं को भी शामिल करते हुए आरोपी एजेंट वरयाम सिंह की तलाश तेज कर दी है। यह मामला प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर बिना जांच-पड़ताल किए किसी भी लुभावने ऑफर के झांसे में न आएं।