हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के गुटकर में बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया। यहाँ एक 10वीं कक्षा का छात्र खड्ड में नहाते समय अचानक अचेत होकर डूबने लगा। गनीमत यह रही कि पास ही मौजूद हार्ट इंस्टीट्यूट के दो कर्मचारियों ने अपनी सूझबूझ और मेडिकल ट्रेनिंग का परिचय देते हुए छात्र को न केवल पानी से बाहर निकाला, बल्कि उसे सीपीआर (CPR) देकर मौत के मुँह से वापस खींच लिया। जानकारी के अनुसार, मंडी के एक स्कूल में पढ़ने वाला 10 वर्षीय छात्र सुरेश कुमार (निवासी ब्राधिवीर) अपने कुछ दोस्तों के साथ गुटकर के पास स्थित खड्ड में नहाने गया था। नहाने के दौरान वह अचानक पानी के बीच बेहोश हो गया और गहरे पानी में समाने लगा। उसके साथियों को कुछ समझ आता, इससे पहले ही वह डूबने लगा था। हार्ट इंस्टीट्यूट के कर्मचारियों ने दिखाई बहादुरी इसी दौरान पास ही स्थित हार्ट इंस्टीट्यूट गुटकर के दो कर्मचारी, रजत और बलदेव, की नजर डूबते हुए छात्र पर पड़ी। उन्होंने बिना समय गंवाए पानी में छलांग लगा दी और छात्र को सुरक्षित किनारे पर ले आए। किनारे पर लाने के बाद छात्र की सांसें थम चुकी थीं और वह पूरी तरह अचेत था। रजत और बलदेव ने तुरंत छात्र को सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू किया। कुछ देर तक सीपीआर देने के बाद जब छात्र की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ, तो उसे तुरंत मांडव अस्पताल गुटकर पहुँचाया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो वीरवार को इस बचाव कार्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह दोनों युवक कड़ी मेहनत के साथ छात्र की जान बचाने के लिए उसे प्राथमिक उपचार दे रहे हैं। नेटिजन्स और स्थानीय लोग दोनों युवकों की बहादुरी और मेडिकल कौशल की जमकर तारीफ कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय पर सीपीआर न मिलता, तो परिणाम घातक हो सकते थे। रजत और बलदेव ने मानवता की मिसाल पेश की है। यह घटना एक बार फिर प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर जैसी तकनीकों की जानकारी होने के महत्व को रेखांकित करती है। फिलहाल छात्र सुरेश कुमार खतरे से बाहर बताया जा रहा है।