सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि पत्नी का अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिशों को ‘वैवाहिक क्रूरता’ नहीं मान सकते। सर्वोच्च अदालत ने ऐसी सोच को 21वीं शताब्दी में भी महिलाओं को पति की सहमति तक सीमित करने वाली पिछड़ी मानसिकता बताया। 

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