हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों के विलय (मर्जर) से जुड़े अपने पहले के फैसले को रद्द कर दिया है। शिक्षा विभाग ने 23 अप्रैल 2026 को एक नई अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में विलय किए गए कुछ स्कूलों को अब अलग-अलग संचालित किया जाएगा। सरकार के इस संशोधन से कांगड़ा, मंडी और धर्मशाला सहित कई क्षेत्रों के स्कूल प्रभावित होंगे। इनमें नूरपुर, धर्मशाला, सरकाघाट और देहरा के वे स्कूल शामिल हैं, जिन्हें पहले एकल सह-शिक्षा (को-एजुकेशनल) संस्थान बनाने के लिए आपस में मिलाया गया था।
दो अलग अलग स्कूल होंगे संचालित नई अधिसूचना के अनुसार, अब इन सभी मामलों में दो अलग-अलग स्कूल संचालित किए जाएंगे। इनमें से एक स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध होगा, जबकि दूसरा हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) से जोड़ा जाएगा। दोनों संस्थान सह-शिक्षा के रूप में ही कार्य करेंगे। 10वीं तक संचालित होंगे हिमाचल बोर्ड के स्कूल सरकार ने स्पष्ट किया है कि CBSE से संबद्ध स्कूल सीनियर सेकेंडरी स्तर (कक्षा 12 तक) का होगा। हिमाचल बोर्ड से संबद्ध स्कूल हाई स्कूल (कक्षा 10 तक) के रूप में चलेंगे। शिक्षा विभाग के सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूलों के लिए भवन और अन्य संसाधनों का निर्धारण स्कूल शिक्षा निदेशक द्वारा किया जाएगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध आधारभूत ढांचे का आकलन किया जाएगा। कई क्षेत्रों के लिए मिली राहत इससे पहले, सरकार ने छात्र संख्या व संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से कई स्कूलों को मर्ज करने का निर्णय लिया था। फैसले को वापस लेने के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर इसको राहत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मर्जर के कारण दूरी और प्रबंधन संबंधी दिक्कतें आ रही थीं।