दिल्ली व चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन-सदन और विल्लीज पार्क में 233% किराया बढ़ोतरी का फैसला GAD ने सरकार की फजीहत कराने के बाद वापस ले लिया है। यह पहला मौका नहीं है जब अफसरों के कारण राज्य सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा हो। हिमाचल में समोसा कांड की CID जांच, टॉयलेट टैक्स और CM के डिनर में जंगली मुर्गा जैसे चर्चित कांड भी अफसरों की लापरवाही से हुए। इनकी वजह से सुक्खू सरकार न केवल हिमाचल, बल्कि पूरे देश में सुर्खियां बटोर चुकी है। यही वजह है कि डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री अफसरों को रात के अंधेरे में निपट लेने की सीएम सुक्खू को नसीहत दे चुके हैं। PWD मंत्री विक्रमादित्य भी UP-बिहार के अफसरों को शासक न बनने की चेतावनी दे चुके हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, चार बार के पूर्व मंत्री और आठ बार के पूर्व विधायक कौल सिंह ठाकुर भी अफसरों के कारण सीएम की कार्यशैली पर प्रश्न खड़े कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर आम जनता भी बार बार ऐसे प्रश्न पूछ रही है। इससे सियासी गलियारों में यहां तक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अफसर जानबूझ कर सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रहे है? सिलसिलेवार पढ़े सरकार के फैसले जिन्हें जनता के विरोध के कुछ घंटों में पलटा गया… सरकार को ‘पलटूराम’ कह रहा विपक्ष इस वजह से विपक्ष भी लगातार सुक्खू सरकार पर हमलावर है और सरकार को “पलटूराम” कहकर निशाना साध रहा है। सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी कुछ नेता आवाजें उठाने लगे हैं। इससे सवाल सीधे सीएम सुक्खू की कार्यशैली पर खड़े हो रहे हैं। फाइनेंस सेक्रेटरी सब बंद करने को कह रहे केंद्र द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने पर फाइनेंस सेक्रेटरी देवेश कुमार ने भी सभी कल्याणकारी योजनाएं, सब्सिडी बंद करने की बात कही। सवाल उठ रहे हैं कि अफसरों पर मुख्यमंत्री का कोई नियंत्रण नहीं है। चेस्टर हिल मामले में चार पूर्व व मौजूदा चीफ सेक्रेटरी की लड़ाई खुलकर सामने आ चुकी है। मगर सरकार की ओर से इन पर कार्रवाई नहीं की गई।

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