धर्मशाला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में एक रिटायर्ड अफसर के निर्माणाधीन भवन तक अवैध सड़क बनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि निर्माण में स्मार्ट सिटी के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट के बजट का दुरुपयोग किया गया है। साढ़े चार करोड़ रुपये के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में से लगभग 48 लाख रुपये इस सड़क के निर्माण पर खर्च किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सड़क मूल योजना का हिस्सा नहीं थी। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के अनुसार, इसे बाद में ग्रामीणों की मांग पर बनाया गया, लेकिन यह सीधे रिटायर्ड अफसर के निजी परिसर को लाभ पहुंचा रही है। 48 लाख की लागत से सड़क बनाई इस मामले में पर्यावरणीय नियमों की गंभीर अनदेखी भी सामने आई है। सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का मुख्य निर्माण वन भूमि पर हुआ था, जिसके लिए स्मार्ट सिटी ने एफआरए के तहत अनुमति ली थी। हालांकि, जिस जमीन पर 48 लाख की लागत से सड़क बनाई गई, उसके लिए लोक निर्माण विभाग ने वन संरक्षण अधिनियम के तहत केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को केस भेजा था। केंद्र सरकार से नहीं मिली है मंजूरी बड़ी बात यह है कि केंद्र सरकार से इस सड़क निर्माण के लिए आज तक मंजूरी नहीं मिली है, फिर भी नियमों को ताक पर रखकर डामर बिछा दिया गया। बिना वन मंजूरी के इतनी बड़ी राशि का उपयोग वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा करता है। इसके अलावा, जहां एक तरफ सोलर प्लांट के लिए वन भूमि का उपयोग हुआ, वहीं इसके साथ लगती जमीन को रहस्यमय तरीके से निजी संपत्ति घोषित कर दिया गया। स्मार्ट सिटी द्वारा लगाई गई फैंसिंग को भी भवन निर्माणकर्ता ने उखाड़ कर नए स्थान पर स्थानांतरित कर दिया है। संबंधित अधिकारी इस पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं। एसडीओ ने मामले से जताई अनभिज्ञता प्रशासनिक गलियारों में इस खुलासे ने हड़कंप मचा दिया है और अब नगर निगम प्रशासन भी बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है। धर्मशाला नगर निगम के एसडीओ जोगिंदर ने इस मामले पर अनभिज्ञता जताते हुए कहा है कि जांच के बाद ही तथ्यों को साझा किया जाएगा। टाउन प्लानर ने जांच के दिए आदेश वहीं निगम के टाउन प्लानर प्रतीक महाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वार्ड नंबर 14 के संबंधित क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने संबंधित जूनियर इंजीनियर को मौके की पूरी रिपोर्ट जुटाने के निर्देश दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सड़क और मकान का निर्माण वास्तव में कौन करवा रहा है। यह मामला इसलिए भी पेचीदा है क्योंकि संबंधित भूमि मुश्तरका होने के कारण धर्मशाला न्यायालय में विचाराधीन है और अन्य भू-मालिकों की याचिका पर इस पर स्टे लगा हुआ है।

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