हिमाचल सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित विधायकों के वेतन का एक हिस्सा अगले छह महीनों के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने के आदेश जारी कर दिए है। अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री की सैलरी का 50 प्रतिशत, डिप्टी सीएम, मंत्रियों के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन का 30 प्रतिशत तथा सभी विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा अगले छह माह के लिए रोका जाएगा। यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 162 और 166 के तहत जारी किया गया है। सीएम सुक्खू ने इसकी घोषणा 2026-27 के बजट भाषण में की थी। हालांकि, उस दिन सीएम सीनियर ब्यूरोक्रेट्स, क्लास-1 और क्लास-2 अधिकारियों का वेतन डेफर करने की घोषणा की था, लेकिन हिमाचल दिवस पर सीएम ने क्लास-1 और क्लास-2 की सैलरी डेफर का ‌फैसला वापस ले लिया। आज के ऑर्डर में ब्यूरोक्रेट्स की सैलरी डेफर करने का जिक्र नहीं है। वेतन प्रणाली में पारदर्शिता पर जोर सरकार ने स्पष्ट किया कि वेतन का भुगतान और स्थगित हिस्सा ई-सैलरी सिस्टम और वेतन पर्ची में अलग-अलग दर्शाया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। कर और कटौतियों पर स्पष्ट नियम अधिसूचना में कहा गया है कि आयकर सहित सभी वैधानिक कटौतियां पूर्ण वेतन पर ही लागू होंगी, ताकि भविष्य में लेखा संबंधी कोई समस्या न हो। स्थगित राशि की गणना टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद बचे वेतन पर की जाएगी। HBA/MCA लोन लेने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए प्रावधान जो जनप्रतिनिधि हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) या मोटर कार एडवांस (MCA) की किस्त चुका रहे हैं, उनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे जनप्रतिनिधि DDO को निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र देकर किस्त कटौती के बाद बचे वेतन पर ही स्थगन का लाभ ले सकेंगे। स्थगित वेतन बाद में मिलेगा सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राशि किसी प्रकार की कटौती नहीं मानी जाएगी, बल्कि इसे बाद में राज्य की वित्तीय स्थिति के अनुसार जारी किया जाएगा।

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