धर्मशाला की प्रसिद्ध डल झील में अब हरिद्वार की गंगा आरती की तर्ज पर प्रतिदिन संध्या महाआरती का आयोजन किया जाएगा। यह भव्य आयोजन 1 जून से मैक्लोडगंज स्थित श्री दुर्बेश्वर महादेव मंदिर और डल झील के तट पर शुरू होगा। उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने श्री दुर्बेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद इस महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की। पठानिया ने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि डल झील, जो तकनीकी कारणों और रिसाव (सीपेज) की वजह से उपेक्षा का शिकार रही है, उसे जल्द ही अपने पुराने स्वरूप में लौटाया जाएगा। वर्तमान में झील में केवल बरसात के मौसम में पानी टिक पाता है, लेकिन अब साल भर जल भराव सुनिश्चित किया जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 1 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, जिसके लिए पठानिया ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। योजना के तहत, मंदिर परिसर का विकास पारंपरिक पूजा पद्धति के साथ-साथ डिजिटल और व्यवस्थित रूप से भी किया जाएगा। महाआरती के शुरू होने से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और कांगड़ा के धार्मिक पर्यटन सर्किट को एक नई पहचान मिलेगी। श्रद्धालुओं को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं प्रदान करना सरकार का लक्ष्य डल झील का महत्व केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण ही नहीं है, बल्कि यहां लगने वाला ‘राधाष्टमी’ का मेला और दुर्बेश्वर महादेव के प्रति अटूट आस्था इसे एक विशेष धार्मिक स्थल बनाती है। उपमुख्य सचेतक ने विश्वास दिलाया कि सरकार का लक्ष्य मंदिरों के विकास के साथ-साथ वहां आने वाले श्रद्धालुओं को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं प्रदान करना है। इस नई पहल के बाद अब शाम के समय डल झील का तट दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार से सराबोर रहेगा, जो हिमाचल प्रदेश की धार्मिक पर्यटन नीति में एक मील का पत्थर साबित होगा।