भास्कर एक्सपर्ट प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर इस बार युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। खासतौर पर बेरोजगार युवा पंचायत राजनीति को अपने नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी का माध्यम बना रहे हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बीते साल हुए पंचायत चुनाव और आगामी चुनाव को लेकर एक सर्वे किया गया। इसमें सामने आया है कि शिक्षित युवा, यहां तक कि पीएचडी कर चुके अभ्यर्थी भी पंचायत चुनाव लड़ने में रुचि दिखा रहे हैं। यह बदलाव ग्रामीण नेतृत्व के स्वरूप में तेजी से हो रहे परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। इस बार के चुनाव में 21 से 35 उम्र के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं। छात्र राजनीति बंद होने के चलते भी पंचायत चुनाव में युवाओं की सक्रिय भागेदारी देखी जा रही है। बीते चुनाव में रही 72 फीसदी से अधिक युवाओं की भागेदारी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास विभाग के सर्वे के अनुसार, बीते पंचायत चुनावों के दौरान प्रदेश में कुल 97502 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन वापसी के बाद 78072 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए। इनमें से 26727 उम्मीदवार विभिन्न पंचायत पदों पर निर्वाचित हुए। आयु वर्ग के आधार पर किए गए विश्लेषण में स्पष्ट हुआ कि पंचायतों में युवा नेतृत्व की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 9223 प्रतिनिधि पंचायतों में पहुंचे, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 34.51 प्रतिशत है। वहीं 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 10,030 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनकी हिस्सेदारी 37.53 प्रतिशत रही। इन दोनों आयु वर्गों को मिलाकर कुल 72 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधि युवा रहे, जो इस बात का संकेत है कि पंचायतों में नेतृत्व की कमान अब तेजी से युवा हाथों में जा रही है। 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 5105 प्रतिनिधि निर्वाचित इसके विपरीत, 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 5105 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनका प्रतिशत 19.10 रहा। 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग से 1981 प्रतिनिधि यानी 7.41 प्रतिशत चुने गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से केवल 388 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनकी हिस्सेदारी महज 1.45 प्रतिशत रही। ये आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक रूप से वरिष्ठ नेतृत्व वाली पंचायत व्यवस्था अब युवा प्रधान होती जा रही है। इससे ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद सर्वे में सामने आया कि बेरोजगारी से जूझ रहे शिक्षित युवा पंचायत चुनावों को स्थानीय स्तर पर नेतृत्व स्थापित करने और विकास कार्यों में सीधे भागीदारी का अवसर मान रहे हैं। कई युवा इसे राजनीतिक करियर की शुरुआत के रूप में भी देख रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बढ़ने और डिजिटल माध्यमों की पहुंच बढ़ने से युवा विकास योजनाओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं। पंचायतों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से स्थानीय स्तर पर नवाचार, पारदर्शिता और तेज निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा। युवा प्रतिनिधि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। डॉ. बलदेव नेगी, प्रोफेसर व रिसर्चर, ग्रामीण विकास विभाग एचपीयू

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