हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का बिगुल बज गया है। राज्य के चार जिलों के डीसी ने आज आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया है। इनमें कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिला शामिल हैं। लाहौल-स्पीति जिला के डीसी ने जिला परिषद के लिए आरक्षण रोस्टर नोटिफाई कर दिया है, जबकि प्रधान, वार्ड मेंबर और पंचायत समिति का रोस्टर अभी आना बाकी है। राज्य के अन्य जिलों के डीसी को भी हाईकोर्ट के आदेशानुसार आज या फिर कल तक आरक्षण रोस्टर हर हाल में फाइनल करना है, क्योंकि कोर्ट के आदेशों पर सरकार ने डीसी को सात अप्रैल की डेडलाइन दे रखी है। आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद जनरल कैटेगिरी के सैकड़ों लोगों के चुनाव लड़ने के सपने पर पानी फिर गया है। 4 जिलों में रोस्टर से तस्वीर साफ वहीं चार जिलों में आरक्षण रोस्टर के बाद यह तस्वीर साफ हो गई है कि कौन सी पंचायत महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, एससी महिला, एसटी महिला, ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई है। 44 फीसदी सीटें ओपन इन चार जिलों में लगभग 44 फीसदी सीटें ओपन रही हैं, जबकि लगभग 56 फीसदी पद आरक्षित हुए हैं, क्योंकि राज्य में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इस वजह से ओपन पंचायतें कम बचती हैं। उप प्रधान पद को नहीं लगता रोस्टर राज्य में आरक्षण रोस्टर प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य (BDC) और जिला परिषद के लिए लागू होता है। उप प्रधान इकलौता ऐसा पद है जिस पर आरक्षण रोस्टर नहीं लगता और कोई भी व्यक्ति इस पद पर चुनाव लड़ सकता है। 3600 से ज्यादा पंचायतों में होने है चुनाव प्रदेश में 3600 से ज्यादा पंचायतों और 73 नगर निकायों में 31 मई से पहले चुनाव होने हैं। आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद चुनावी गतिविधियां बढ़ गई हैं। नगर निकायों के लिए पहले ही आरक्षण रोस्टर जारी किया जा चुका है। अब कुछ जिलों में पंचायत चुनाव के रोस्टर का इंतजार है। हाईकोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें इस बीच हिमाचल हाईकोर्ट में भी आज पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर लगाने के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होनी है। राज्य सरकार ने 5 फीसदी सीटों के आरक्षण का अधिकार डीसी को दिया है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर आज हाईकोर्ट का फैसला संभावित है। कुछ देर बाद हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई होगी।

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