हिमाचल प्रदेश सरकार ने चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन विवाद में कड़ा रुख अपनाते हुए डीसी सोलन को जांच के आदेश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले में हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट 1972 की धारा 118 के तहत उल्लंघन का केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार ने यह भी कहा है कि संबंधित सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए। इन आदेशों के बाद चेस्टर हिल्स जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं और संभावित घोटाले में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में बेनामी लेनदेन सिद्ध होता है, तो संबंधित जमीन सरकार में निहित (वेस्ट) की जा सकती है। एसडीएम सोलन की जांच से फर्जीवाड़े का खुलासा इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सोलन के एसडीएम (नागरिक) की विस्तृत जांच रिपोर्ट है, जिसमें चेस्टर हिल्स रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के संकेत दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन भले ही कागजों में एक स्थानीय कृषक के नाम पर दर्ज है, लेकिन वास्तविक विकास, निर्माण, मार्केटिंग और फ्लैटों की बिक्री एक गैर-कृषक फर्म द्वारा संचालित की जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संयुक्त विकास समझौते (JDA) के जरिए जमीन से जुड़े अधिकांश अधिकार डेवलपर को हस्तांतरित कर दिए गए थे। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि फ्लैट खरीदारों से प्राप्त भुगतान सीधे डेवलपर फर्म के खातों में जमा हुए। खरीदारों द्वारा प्रस्तुत एग्रीमेंट, रसीदें और बैंक लेनदेन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि परियोजना का वास्तविक वित्तीय और व्यावसायिक नियंत्रण डेवलपर के पास था। जमीन खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की संभावना रिपोर्ट में आय और संपत्ति के बीच असामान्यता की ओर भी इशारा किया गया है। सीमित आय के बावजूद बड़े पैमाने पर भूमि खरीद को संदिग्ध बताते हुए इसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई गई है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार इस जांच रिपोर्ट को पहले सचिवालय स्तर पर आगे नहीं बढ़ाया गया। इसी मामले में एडवोकेट ने मुख्य सचिव के खिलाफ दी शिकायत इधर, 23 मार्च को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय शर्मा ने इस मामले में छोटा शिमला पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए मुख्य सचिव संजय गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। शिकायत में करीब 1500 करोड़ रुपये के कथित जमीन घोटाले के आरोप लगाए गए हैं। माकपा ने भी मुख्य सचिव के खिलाफ मोर्चा खोला इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब माकपा ने ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग की। ऐसा नहीं करने पर सचिवालय के घेराव की चेतावनी भी दी। यह मुद्दा राज्य विधानसभा में भी गूंजा। लगातार बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच अब राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। धारा 118 के उल्लंघन से जुड़े मामलों में कार्रवाई के अधिकार डीसी के पास होते हैं, ऐसे में अब इस पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई डीसी सोलन द्वारा की जाएगी। सरकार ने भी गड़बड़ियों की पुष्टि की: टिकेंद्र शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि सरकार का आदेश पुष्टि करता है कि चेस्टर हिल मामले में उच्च अधिकारियों के इशारे पर व्यापक उल्लंघन हुआ है। शुक्र है कि सरकार ने इस आदेश के माध्यम से पिछले आदेश को रद्द कर दिया है और डीसी सोलन को धारा 118 के उल्लंघन और जांच को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब सवाल उठता है कि ऐसे सौदों में निहित ‘गोल्डन हैंडशेक’ का क्या होगा? उन्होंने उम्मीद जताई की इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और असल दोषी सामने आएंगे।

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