हिमाचल प्रदेश एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन से संबंद्ध किन्नौर टूरिज्म एसोसिएट्स ने राज्य वन विभाग के ट्रेकिंग मार्गों को निजी संस्थाओं और कॉरपोरेट घरानों को पट्टे पर देने के निर्णय की निंदा की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र मोहन नेगी और महासचिव नव प्रकाश नेगी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे स्थानीय लघु उद्यमियों के हितों के खिलाफ बताया। नेगी ने कहा कि हिमाचल में एडवेंचर टूरिज्म का वर्तमान स्वरूप स्थानीय युवाओं के दशकों के संघर्ष और मेहनत का परिणाम है। जब यह क्षेत्र चुनौतियों से भरा था, तब स्थानीय संचालकों ने इसे विकसित किया। अब यह उद्योग हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुका है। पर्यटन क्षेत्र में एकाधिकार बढ़ेगा एसोसिएशन का मानना है कि सरकार का यह निर्णय स्थानीय कार्यबल और उनकी भूमि से जुड़े गहरे संबंधों की अनदेखी करता है। निजी हाथों में मार्ग सौंपने से पर्यटन क्षेत्र में एकाधिकार बढ़ेगा और छोटे ऑपरेटर बाजार से बाहर हो जाएंगे। इससे गाइड, रसोइये, सहायक और खच्चर चालकों जैसे हजारों हितधारकों का रोजगार प्रभावित होगा। निर्णय स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन एसोसिएशन ने यह भी कहा कि मुनाफे की होड़ में पट्टेदार पर्यावरण मानकों और सुरक्षा की अनदेखी कर सकते हैं, जिससे हिमालयी पारिस्थितिकी का क्षरण निश्चित है। यह निर्णय स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। कॉरपोरेट प्रबंधन से ‘ओवर-टूरिज्म’ को बढ़ावा मिलेगा, जो राज्य की पर्यावरण पर्यटन नीति के लिए घातक होगा। निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग एसोसिएशन का मानना है कि स्थानीय संचालक केवल व्यवसाय नहीं करते, बल्कि वे ‘भूमि के संरक्षक’ हैं जो सुरक्षा और टिकाऊ पर्यटन सुनिश्चित करते हैं। अध्यक्ष चंद्र मोहन नेगी ने कहा कि बाहरी निगमों के पास इस कठिन क्षेत्र का अनुभव और भविष्य की दूरदर्शिता नहीं है। केवल धन को प्राथमिकता देने से स्थिरता और संतुलित विकास का लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा। एसोसिएशन ने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने और स्थानीय हितधारकों के हितों की रक्षा करने की पुरजोर मांग की है।