हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सेशन से पहले भारतीय जनता पार्टी विधायकों ने सदन के बाहर धरना दिया। विपक्ष ने पंचायत चुनाव के आरक्षण रोस्टर नियमों में जोड़े गए नए प्रावधान के खिलाफ नारेबाजी की और लोकतंत्र का गला घोंटने वाला फैसला बताया। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर तानाशाही और हेराफेरी करने के आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू उल-जलूल फैसले लेने को जाने जाते हैं। इन फैसलों के कारण बार-बार पूरे देश में जग हंसाई हो चुकी है। अब फिर से ऐसा ही फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले कभी भी पंचायत चुनाव लेट नहीं हुए। मगर कांग्रेस सरकार ने चुनाव टालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा- कोर्ट के आदेशों पर अब चुनाव कराए जा रहे हैं और जब चुनाव का रोस्टर आना था तो सरकार ने अब आरक्षण रोस्टर के नियम बदल डाले। डीसी को आरक्षण रोस्टर का अधिकार लोकतंत्र का गला घोंटने वाला: जयराम जयराम ने कहा- 31 मार्च को आरक्षण रोस्टर लगना था, लेकिन पिछले कल पंचायत के आरक्षण रोस्टर में नया प्रावधान जोड़ दिया गया। इसमें 5 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार डीसी को दिया गया, जो कि संविधान के अनुच्छेद 243(D) का उल्लंघन है। उन्होंने कहा- 243(D) के अनुसार आरक्षण तय करने का आधार जनसंख्या है, लेकिन सुक्खू सरकार ने डीसी को इसकी शक्तियां दे दीं। इसका असर एक कोने से दूसरे कोने तक जाएगा। उन्होंने कहा कि अपने लोगों के लिए चुन-चुनकर पंचायतें ओपन करने की साजिश है। सदन के भीतर और बाहर विरोध करेगी कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार के इस फैसले का सदन के भीतर और बाहर विरोध किया जाएगा। इस मामले में सदन में चर्चा के लिए पार्टी के विधायक रणधीर शर्मा ने विधानसभा सचिवालय को नोटिस दे दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही है। कांग्रेस सरकार ने दो दिन पहले बदले नियम बता दें कि कांग्रेस सरकार ने आरक्षण रोस्टर के नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत 95 प्रतिशत पंचायतों में आरक्षण नियमों के तहत होगा, जबकि पांच प्रतिशत पंचायतें आरक्षित करने का अधिकार डीसी को दे दिया गया है। संशोधित नियमों में तर्क दिया गया कि यह बदलाव भौगोलिक या विशेष परिस्थितियों को देखते हुए किया जाएगा। 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में होने हैं चुनाव प्रदेश की 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में 31 मई से पहले चुनाव हैं। पंचायतों में प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए इलेक्शन होने हैं, जबकि शहरी निकायों में पार्षदों का चयन होना है। इनमें से उप प्रधान को छोड़कर हर पद के लिए आरक्षण रोस्टर लगता है। पंचायत जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका पंचायतों और नगर निकायों के पूर्व पदाधिकारियों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इस वजह से पंचायत और निकायों में सरकार ने एडमिनिस्ट्रेटर बिठा रखे हैं, क्योंकि राज्य में चुनाव समय पर नहीं करवाए जा सके।