कांगड़ा जिले के धर्मशाला में तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने पाम संडे के अवसर पर पोप लियो द्वारा शांति के लिए की गई अपील का समर्थन किया है। उन्होंने हथियारों को त्यागने और हिंसा का मार्ग छोड़ने के पोप के आह्वान को मानवता के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। दलाई लामा ने कहा कि पोप की यह अपील उनके मन को गहराई से छू गई है। उन्होंने इसे दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों की मूल शिक्षाओं के अनुरूप बताया। आध्यात्मिक गुरु ने स्पष्ट किया कि चाहे ईसाई धर्म हो, बौद्ध धर्म, इस्लाम, हिंदू, यहूदी या कोई भी अन्य महान आध्यात्मिक परंपरा, सभी का मूल संदेश प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और आत्म-अनुशासन है। दलाई लामा ने शांति का दिया संदेश दलाई लामा ने जोर दिया कि हिंसा का इन पवित्र शिक्षाओं में कोई स्थान नहीं है। इतिहास गवाह है कि हिंसा कभी भी शांति का स्थायी आधार नहीं बन सकती, बल्कि यह केवल अधिक हिंसा को जन्म देती है। दुनिया में चल रहे युद्धों को रोकने की अपील रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के संकटों का जिक्र करते हुए दलाई लामा ने संदेश दिया कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और आपसी सम्मान के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि हम सभी बुनियादी तौर पर भाई-बहन हैं। दलाई लामा ने वैश्विक स्तर पर प्रार्थना और आग्रह किया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्ष और हिंसा जल्द से जल्द समाप्त हों, ताकि मानवता चैन की सांस ले सके।

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