हिमाचल प्रदेश स्कूल मिड डे मील वर्कर यूनियन (सीटू) ने 22 जून को प्रदेशव्यापी हड़ताल और शिमला में सचिवालय घेराव का ऐलान किया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो आंदोलन तेज किया जाएगा। बता दे कि मंडी जिले से करीब 500 वर्करों के इस आंदोलन में भाग लेने की संभावना है। इसी क्रम में यूनियन की जिला कमेटी की बैठक मंडी जिले के ताराचंद भवन मंडी में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष संतोष कुमारी ने की, जबकि संचालन जिला सचिव ललिता कुमारी ने किया। इसमें जिले के 10 शिक्षा खंडों के कमेटी सदस्यों ने भाग लिया और मिड डे मील वर्करों की समस्याओं पर गहन चर्चा की गई। 12 साल से नहीं बढ़ा मानदेय यूनियन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। वर्तमान में मिलने वाली 1000 रुपए की राशि भी 3 से 5 माह की देरी से मिलती है। वहीं, प्रदेश सरकार द्वारा दिए जाने वाले 4000 रुपए का भुगतान भी 5 माह बाद किया जाता है। छुट्टियों का पैसा कटने से आर्थिक परेशान इसमें भी छुट्टियों का पैसा काट लिया जाता है, जिससे वर्करों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यूनियन ने बताया कि जिले में मानदेय की एकरूपता नहीं है; कहीं 2500, कहीं 2800 तो कहीं 3500 रुपए दिए जा रहे हैं। केवल 10 महिने का हो रहा भुगतान इसके अलावा, वर्करों को 12 माह के बजाय केवल 10 माह का वेतन दिया जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट 2019 और 2022 में वर्करों के पक्ष में फैसला दे चुका है। यूनियन का यह भी आरोप है कि सरकार ने इसके बावजूद मामला सुप्रीम कोर्ट में ले जाकर वर्करों के हितों को नजरअंदाज किया है। खाना बनाने के अलावा अन्य कार्य भी करवाए जा रहे वर्करों को कोई अवकाश नहीं मिलता है। बीमारी या जरूरी काम होने पर उन्हें अपनी जेब से 600 रुपए देकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है, जबकि उनकी खुद की दिहाड़ी मात्र 150 रुपए है। इसके अतिरिक्त, वर्करों से खाना बनाने के अलावा अन्य कार्य भी करवाए जाते हैं, जो उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आते। छात्रों की संख्या कम होने पर वर्करों को हटाने की समस्या भी सामने आ रही है, जिससे उनमें भारी रोष है।

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