मंडी जिले के सुंदरनगर में आयोजित पांच दिवसीय सुकेत देवता मेला शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान सुंदरनगर की सुकेत नगरी आस्था, परंपरा और देव संस्कृति के रंग में रंगी नजर आई। महामाया मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा में सैकड़ों देवी-देवताओं ने भाग लिया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा की अगुवाई सुकेत अधिष्ठात्री देवी महामाया के रथ ने की। भगवान शिव, भगवान श्रीकृष्ण और देवी पांगणा की पालकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जलेब का नेतृत्व मूल महूनाग ने किया, जबकि बड़ा देव कमरुनाग ने अन्य देवी-देवताओं का मार्गदर्शन किया। कई इलाकों से गुजरी शोभायात्रा करीब 200 देवी-देवताओं के रथों के साथ निकली यह शोभायात्रा नगर के विभिन्न हिस्सों, जैसे चतरोखड़ी, ललित नगर, सलाह और भोजपुर से गुजरी। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा सुंदरनगर दिनभर ढोल-नगाड़ों तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से भक्तिमय बना रहा। समारोह में हिमाचल प्रदेश स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इसके बाद ‘राजे की जातर’ रंग महल पहुंची, जहां राजपरिवार के कुंवर जय सिंह और राजकुमार आर्यमन सिंह ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवी-देवताओं का स्वागत कर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। देवी-देवताओं को चादर और नजराना भी अर्पित शोभायात्रा आगे जवाहर पार्क पहुंची, जहां नव कन्या पूजन सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। मेला कमेटी की ओर से देवी-देवताओं को चादर और नजराना भी अर्पित किया गया। मुख्य अतिथि कुलदीप सिंह पठानिया ने इस अवसर पर कहा कि हिमाचल की देव संस्कृति प्रदेश की पहचान और गौरव है, जिसे सहेजना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। समापन अवसर पर ढोल-नगाड़ों की मधुर धुनों के बीच देवी-देवताओं को भावभीनी विदाई दी गई। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने देव आशीर्वाद प्राप्त किया और इसी के साथ पांच दिवसीय सुकेत देवता मेले का विधिवत समापन हो गया।

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