हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने आरक्षण रोस्टर के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। राज्य में जो पंचायते किसी एक श्रेणी के लिए लगातार दो बार आरक्षित रही है, उन्हें इस बार ओपन कर दिया जाएगा। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए नियमों में संशोधन करके बीती शाम को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इस नोटिफिकेशन के साथ ही हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम, 2026 लागू कर दिए गए हैं, जिनका असर सीधे 3700 से अधिक पंचायतों में होने वाले चुनावों पर पड़ेगा। राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार- पंचायत चुनाव 31 मई से पहले प्रस्तावित हैं। इसके लिए सभी जिलों के DC को 31 मार्च से पहले आरक्षण रोस्टर लगाना है। पूर्व में ज्यादातर जिलों के डीसी ने आरक्षण रोस्टर की एक्सरसाइज पुराने नियमों के तहत पूरी कर ली थी। मगर राज्य सरकार ने पिछली कैबिनेट मीटिंग में ही लगातार दो बार आरक्षित रही पंचायतों को ओपन करने का निर्णय लिया है। ऐसे में अब डीसी को आरक्षण रोस्टर नए नियमों के तहत दोबारा लगाना होगा। नए नियमों से क्या असर पड़ेगा? पंचायत चुनाव पांच पदों के लिए करवाए जाते है। इनमें पहला- प्रधान, दूसरा- उप प्रधान, तीसरा- वार्ड मेंबर, चौथा पंचायत समिति सदस्य और पांचवां- जिला परिषद का शामिल है। इनमें से उप प्रधान का इकलौता ऐसा पद है जिसके लिए आरक्षण रोस्टर लागू नहीं होता। अन्य चारों पदों के लिए आरक्षण रोस्टर लगता है। जो पद 2 बार एक श्रेणी आरक्षित रहा, वहां बदलेगा रोस्टर नए नियमों के अनुसार, यदि उक्त चारों में से कोई पद लगातार दो कार्यकाल तक किसी एक आरक्षित श्रेणी के लिए रखा गया है, तो इस बार वह सीट ओपन (अनारक्षित) मानी जाएगी। एक ही वर्ग को आरक्षण देने की व्यवस्था पर रोक लगाई गई है। हालांकि, सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। यदि किसी श्रेणी के लिए तय आरक्षण प्रतिशत पूरा नहीं होता है, तो उस स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा और आरक्षण जारी रखा जा सकेगा। इससे आरक्षण संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। यह संशोधन पहले 13 मार्च 2026 को ड्राफ्ट के रूप में जारी किया गया था और आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई आपत्ति न मिलने के बाद अब इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। सरकार का आरक्षण में पारदर्शिता का दावा सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य पंचायत स्तर पर आरक्षण की पारदर्शिता, संतुलन और समान अवसर सुनिश्चित करना है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने से कई पंचायतों में आरक्षण की स्थिति बदलेगी, जिससे चुनावी समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए अब सभी जिलों में प्रशासनिक स्तर पर रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

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