भरमौर के ऐतिहासिक चौरासी मंदिर परिसर में लंगर और भंडारे पर जिला प्रशासन द्वारा शुल्क लगाए जाने के फैसले से श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों में भारी रोष है। प्रशासन की नई एडवाइजरी के अनुसार, अब चौरासी परिसर में एक दिन का लंगर लगाने के लिए ₹1000 और दो दिन के लिए ₹2500 का शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त, किसी भी धार्मिक आयोजन, शिव पूजन (नुआला) या लंगर सेवा के लिए तीन दिन पहले प्रशासन को सूचना देकर अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। मंदिर आस्था, सेवा और सनातन परंपरा का केंद्र इस फैसले को लेकर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौरासी मंदिर परिसर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, सेवा और सनातन परंपरा का केंद्र है। यहां श्रद्धालु वर्षों से नि:शुल्क लंगर व भंडारे लगाकर पुण्य अर्जित करते आए हैं, विशेषकर मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सेवा भाव से लंगर लगाते हैं। विधायक डॉ. जनक राज ने भी फैसले पर जताई आपत्ति विधायक डॉ. जनक राज ने भी प्रशासन के इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि चौरासी प्रांगण में शिव पूजन और नुआला करने के लिए परिवार की भोलेनाथ के प्रति आस्था ही पर्याप्त है, न कि प्रशासनिक अनुमति। उन्होंने प्रशासन को इस फैसले पर पुनर्विचार कर इसे संशोधित करने के निर्देश दिए हैं। मंदिर के पुजारी भी विरोध में आए, लंगर पर शुल्क थोपना स्वीकार्य नहीं मंदिर के पुजारी रवि दत्त और कन्हैयालाल ने भी इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे आस्था पर सीधी चोट बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को स्वच्छता की चिंता है तो सफाई व्यवस्था मजबूत कर कूड़ेदान लगाए और निगरानी बढ़ाए। लंगर जैसी पवित्र सेवा पर शुल्क थोपना स्वीकार्य नहीं है।

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