हिमाचल प्रदेश सरकार के उपक्रम हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (HPMC) की कार्यप्रणाली सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत मांगी जानकारी के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। HPMC ने जानकारी देने के बजाय सूचना मांगने वाले को कानून का पाठ पढ़ा दिया। HPMC ने जिस सूचना को RTI एक्ट के दायरे से बाहर बताकर शेयर करने से इनकार किया, उसे राज्य के पूर्व मुख्य सूचना (CIC) नरेंद्र चौहान ने पूरी तरह RTI के दायरे में बताया और HPMC के जवाब पर सवाल खड़े किए। नरेंद्र चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय का ईमेल आईडी, MIS योजना के तहत सेब की खरीद के लिए HPMC को अधिकृत करने का प्रस्ताव, खरीद केंद्रों के संचालन के लिए बनाए गए मैकेनिजम और टेंडर डॉक्यूमेंट की सूचना कोई भी व्यक्ति मांग सकता है। पूर्व CIC ने बताया कि आवेदक द्वारा मांगी जानकारी HPMC को जरूर सप्लाई करनी चाहिए थी। MIS योजना में गड़बड़ी के बाद मांगी थी RTI दरअसल, HPMC पर MIS योजना के तहत सेब खरीद मामले में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इसके बाद शिमला के शिलारू निवासी रिटायर चीफ इंजीनियर एवं सेब बागवान सुरेंद्र ठाकुर ने HPMC से RTI के तहत 30 जनवरी 2026 को एक सूचना मांगी। यह सूचना 9 प्वाइंट पर मांगी गई। दो प्वाइंट पर सुरेंद्र ठाकुर को जानकारी दे दी गई और सात प्वाइंट पर जानकारी को RTI एक्ट के दायरे से बाहर बता दिया गया, जो कि पूर्व CIC के मुताबिक सही नहीं है। हाईकोर्ट में अपील पर विचार: सुरेंद्र सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि सरकारी उपक्रम HPMC का रवैया निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि RTI एक्ट पारदर्शिता और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए बनाया गया था, मगर HPMC ने RTI से पल्ला झाड़ा और सूचना छिपाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि एडवोकेट से बात करके इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि सूचना आयोग में 8 महीने से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का पद खाली पड़ा है। संबंधित ब्रांच ने सूचना दी: PIO इस मामले में HPMC के जन सूचना अधिकारी (PIO) कमल देव शर्मा ने बताया कि उन्होंने सुरेंद्र ठाकुर की सूचना संबंधित ब्रांच को भेजी थी। इसके बाद यह जानकारी सप्लाई की गई। उन्होंने बताया कि यदि आवेदक को कोई आपत्ति है तो वह अपील कर सकते हैं। इसे लेकर जब HPMC के मुखिया एवं MD विनय कुमार का पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बार-बार संपर्क करने पर भी फोन नहीं उठाया।