हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचने का मामला सामने आया है। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो शिमला ने इस मामले में जांच तेज कर दी है। विजिलेंस ने तहसीलदार कार्यालय धर्मशाला से 23 खरीदारों से संबंधित रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां अपने कब्जे में ली हैं। इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है और अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, धर्मशाला के मुहाल ठेहड़, चकवन और घन्यारा क्षेत्र में लगभग 35 कनाल सरकारी जमीन थी। यह जमीन रिकॉर्ड में ‘गैर मरुसी’ के रूप में दर्ज थी, लेकिन इसे निजी जमीन बताकर 9 इंतकाल दर्ज किए गए। इन्हीं इंतकालों के आधार पर भू-माफिया ने जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर अन्य लोगों को बेच दिया। इस प्रकार, करोड़ों रुपये की यह बेशकीमती सरकारी जमीन कई निजी हाथों में पहुंच गई। तहसीलदार की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
तहसीलदार धर्मशाला गिरिराज ठाकुर की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिन 9 इंतकालों को अब अवैध मानकर रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, उन्हीं के आधार पर आगे 35 अन्य लोगों को जमीन बेची गई थी। चूंकि मूल इंतकाल ही अवैध पाए गए हैं, इसलिए इन 35 खरीदारों की रजिस्ट्रियां भी कानूनी संकट में फंस गई हैं। उनके निवेश पर अब डूबने का खतरा मंडरा रहा है। 2019 से 2021 के बीच हुई मिलीभगत की साजिश
जांच से यह भी पता चला है कि वर्ष 2019 से 2021 के दौरान भू-माफिया ने कथित तौर पर कुछ अधिकारियों के साथ मिलीभगत की। उन्होंने मुहाल ठेहड़ और चकवन घन्यारा की सरकारी जमीन को पहले कुछ निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करवाया। इसके बाद, जमीन को छोटे टुकड़ों में बांटकर आगे बेचने का सिलसिला शुरू हुआ। सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की पुष्टि
तहसीलदार की रिपोर्ट ने मुहाल ठेहड़ के तीन और मुहाल चकवन घन्यारा के छह इंतकालों में सरकारी मिल्कियत के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि की है। एफआईआर दर्ज करने की तैयारी, प्रभावशाली लोगों पर सस्पेंस
दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि अब तक इस मामले में शामिल प्रभावशाली लोगों और सफेदपोशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।