हिमाचल प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र में नॉन-टीचिंग वर्क के कारण सरकारी स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। राज्य में इस साल पंचायत चुनाव, जनगणना और वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा (SIR) जैसे कार्य एक साथ होने जा रहे हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के लिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। राज्य में इन कामों के लिए 50 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी टीचरों में से तैनात किए जाते रहे हैं। इस बार भी इन तीन जरूरी कार्यों के लिए टीचरों की ड्यूटी इन नॉन-टीचिंग कार्यों के लिए लगाई जाएगी। इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने की संभावना है। खासकर जिन स्कूलों में पहले से ही टीचरों की कमी खल रही है, वहां ज्यादा असर पड़ेगा। राज्य के एजुकेशन मिनिस्टर रोहित ठाकुर ने भी माना कि नॉन-टीचिंग एक्टिविटी में टीचरों की ड्यूटी का असर पढ़ाई पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि इन कार्यों के लिए अधिकतर स्टाफ शिक्षा विभाग से ही लिया जाता है, जिससे स्कूलों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार को इस चिंता से अवगत कराते हुए इन प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। दूसरे विभागों के कर्मचारियों की व्यवस्था करने की मांग शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि सरकार को इन कार्यों के लिए अन्य विभागों से अधिक कर्मचारियों की तैनाती करनी चाहिए, ताकि स्कूलों पर पड़ने वाला दबाव कम हो सके। अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। अगर विज्ञान या गणित के शिक्षक को इन ड्यूटियों में भेज दिया गया, तो उसकी जगह तुरंत दूसरा शिक्षक मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया पर पड़ता है। चुनाव ड्यूटी पर भेजे जाने पर शिक्षक कम से कम 15 दिनों तक स्कूल से दूर रहते हैं। इस बार चुनाव के अलावा जनगणना और वोटर लिस्ट की विशेष समीक्षा में भी ड्यूटी लगाई जाएगी। इसका असर छात्रों पर पड़ेगा। यह मुद्दा पहले भी कई बार सरकार के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। शिक्षित बेरोजगारों की ड्यूटी लगाई जाए: पुंडीर राज्य प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने सुझाव दिया कि सरकार इस दबाव को कम करने के लिए शिक्षित बेरोजगार युवाओं को अस्थायी रूप से शामिल कर सकती है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को केवल निगरानी और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि अन्य कामों के लिए युवाओं की सेवाएं ली जा सकती हैं। जनगणना के लिए गणनाकर्ता (एन्यूमरेटर) के रूप में शिक्षित युवाओं को नियुक्त किया जा सकता है। इससे न केवल युवाओं को अवसर मिलेगा बल्कि स्कूलों की पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित होने से बच सकेगी।

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