हिमाचल प्रदेश पेंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार को शिमला में पेंशनरों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने बजट से पहले अपनी लंबित वित्तीय देनदारियों के समाधान की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 30 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान, पेंशनरों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने वर्ष 2026-27 के बजट में पेंशनरों की लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान के लिए पर्याप्त प्रावधान करने की मांग उठाई। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से पेंशनरों के कई वित्तीय लाभ लंबित हैं, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मांगों पर जल्द समाधान की मांग समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि पेंशनरों की यह लड़ाई किसी राजनीतिक विचारधारा से नहीं, बल्कि उनके अधिकारों और सम्मानजनक जीवन से जुड़ी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आगामी बजट पेश करते समय पेंशनरों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और लंबित देनदारियों के भुगतान को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। जेसीसी की बैठक नहीं होने पर रोष वर्मा ने यह भी बताया कि कर्मचारियों और पेंशनरों के मुद्दों पर संयुक्त परामर्श समिति (जेसीसी) की बैठक लंबे समय से नहीं बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपना चौथा बजट पेश करने जा रहे हैं, लेकिन पिछले चार वर्षों में जेसीसी की एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई है। आंदोलन चेज करने की चेतावनी संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि बजट में पेंशनरों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सोमवार को प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों पर धरने-प्रदर्शन किए गए हैं, और यदि सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है, तो 30 मार्च को शिमला में राज्य स्तरीय रैली के साथ विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

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