हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के 103 वर्षीय भगत राम सरयान एक नई मिसाल बने हैं। चांसू गांव के सरयान ने राजकीय केंद्रीय पाठशाला सांगला और प्राथमिक पाठशाला चांसू को गोद लेने का निर्णय लिया है।पेशे से किसान भगत राम सरयान अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने स्थानीय बच्चों के भविष्य और शिक्षा के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए यह कदम उठाया है। दोनों स्कूलों को गोद लेने के लिए किया था आग्रह सरयान ने राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला सांगला से शिक्षा ग्रहण की थी। वहीं, प्राथमिक पाठशाला चांसू में उनके बच्चों ने पढ़ाई की है। यह पहल स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। चांसू गांव के पूर्व प्रधान अनिल नेगी ने बताया कि उन्होंने दोनों पाठशालाओं को गोद लेने के लिए लिखित आग्रह किया था, जिसे सरयान ने तुरंत स्वीकार कर लिया। नेगी के अनुसार, यह पहल स्थानीय शिक्षा की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्राथमिक पाठशाला चांसू में लाइब्रेरी भवन को अपग्रेड गोद लिए गए स्कूलों में भगत राम सरयान कई सुधार कार्य करवाएंगे। प्राथमिक पाठशाला चांसू में लाइब्रेरी भवन को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि सांगला स्कूल में भवन की मरम्मत और फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। सरयान के एक बेटे सरकारी अधिकारी सरयान के एक बेटे सरकारी अधिकारी हैं, जबकि दूसरे बेटे देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात हैं। अनिल नेगी ने बताया कि सरकारी स्कूलों को गोद लेने का मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं अपने घर पर ही बेहतर शिक्षा का लाभ उठा सकेंगे।