हरियाणा राज्यसभा चुनाव में ‘कांग्रेस के विधायक बचाओ’ मिशन का जिम्मा पार्टी के 4 सांसदों को मिला है। इन्हें रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा लीड कर रहे हैं। हरियाणा में कांग्रेस के 5 सांसद हैं, जिनमें से कुमारी सैलजा अभी तक एक्टिव नजर नहीं आई हैं। सैलजा पार्टी प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध के नोमिनेशन के दौरान भी नहीं आईं थी। हालांकि बौद्ध ने दिल्ली में सैलजा से मुलाकात की थी। कांग्रेस के 37 में से 31 विधायकों को हिमाचल की राजधानी शिमला में कुफरी के पास होटल ट्विन टावर में ले जाया गया है। इसकी निगरानी हिमाचल पुलिस के पास है। चंडीगढ़ से जैसे ही विधायकों की 3 टैंपू ट्रैवलर हिमाचल सीमा में प्रवेश कीं, तभी हिमाचल पुलिस ने एस्कॉर्ट किया। दूसरी तरफ, BJP ने भी अपनी राज्यसभा की दूसरी सीट को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है। एक निर्दलीय विधायक ने दावा किया है कि उनके संपर्क में कांग्रेस के करीब 10 विधायक हैं। हालांकि उन्होंने नामों का खुलासा नहीं किया। इतना संकेत जरूर दिया कि कुछ विधायक बिजनेसमैन हैं। यहां पढ़िए दीपेंद्र के एक्टिव होने की 3 वजहें… 1. हुड्डा फैक्टर: संगठन और विधायकों को साथ रखने की कोशिश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का प्रभाव अभी भी मजबूत माना जाता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय की चर्चा हो रही है। ऐसे में दीपेंद्र ने खुद मोर्चा संभालकर विधायकों को एकजुट रखने और नेतृत्व का भरोसा मजबूत करने की कोशिश की। दरअसल, इस पूरे चुनाव पर पार्टी हाईकमान पूरी मॉनिटरिंग कर रहा है, ऐसे में यदि कोई गड़बड़ी होती है तो सीधे तौर पर हुड्डा के ऊपर बात आएगी। 2. दो घटनाओं ने किया अलर्ट हरियाणा की राजनीति में पहले भी ऐसे मौके आए हैं, जब आखिरी समय में समीकरण बिगड़ने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। क्रॉस वोटिंग और विधायकों की टूट की वजह से पार्टी साल 2016 और 2022 में राज्यसभा में हार झेल चुकी है। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। यही वजह है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने बेटे दीपेंद्र को लास्ट मूवमेंट में आगे कर दिया। 3. उम्मीदवार हारे तो राहुल की नाराजगी का डर कांग्रेस हाईकमान इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल मान रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि राहुल गांधी ने खुद अपनी पसंद का उम्मीदवार चुनाव में उतारा है। अगर पार्टी का उम्मीदवार हार जाता है तो इसकी सीधी राजनीतिक जिम्मेदारी राज्य नेतृत्व पर आती और राहुल की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। इसी वजह से आखिरी समय में सख्त रणनीति बनाकर विधायकों को हरियाणा से बाहर शिफ्ट किया गया। जानिए कांग्रेस हाईकमान ने किसी क्या जिम्मेदारी दी 4 सांसद विधायकों के साथ गए विधायकों के साथ रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा, हिसार सांसद जयप्रकाश जेपी, अंबाला सांसद वरुण चौधरी और सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी को भेजा गया है। वरुण की पत्नी पूजा चौधरी मुलाना तो जेपी के बेटे विकास सहारण कलायत से विधायक हैं। राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला कैथल से विधायक हैं। हालांकि रणदीप सिर्फ नॉमिनेशन वाले दिन ही नजर आए। हुड्डा व हरिप्रसाद खुद देखेंगे वोट पर्यवेक्षक के रूप में खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यानी सभी विधायक अपना वोट इन नेताओं को देखेंगे,ताकि क्रॉस वोटिंग की संभावना न रहे। राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग होती है। दोनों चंडीगढ़ में रहकर मोर्चा संभालेंगे। प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह व आदमपुर से विधायक चंद्रप्रकाश को पोलिंग एजेंट बनाया है। थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा को मतगणना एजेंट बनाया है। रोज हाईकमान से संपर्क होगा, वोटिंग की रिहर्सल होगी विधायकों को एकजुट और मोटिवेट करने के लिए रोजाना हाईकमान की ओर से संदेश आएगा। इसके अलावा वोट रद्द होने की संभावना को टालने के लिए वोट डालने की रिहर्सल भी करवाई जाएगी।
यहां समझिये क्या है BJP की प्लानिंग