किन्नौर में पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के तबादले के बाद ‘नौतोड़’ और वन संरक्षण अधिनियम (FCA) का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रिकांगपिओ में एक पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट और टीएसी सदस्य डॉ. सूर्य बोरस ने भाजपा नेताओं पर जनजातीय विरोधी होने का गंभीर आरोप लगाया। डॉ. बोरस ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में जनजातीय हितैषी होती, तो उनके नेताओं को एफसीए निरस्त करने के लिए पूर्व राज्यपाल के पास पैरवी करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला और प्रदेश स्तर के भाजपा नेताओं ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि राज्यपाल के माध्यम से इस प्रक्रिया को रुकवाने का काम किया। कांग्रेस का भाजपा पर तंज बोरस ने तंज कसते हुए कहा कि आज राज्यपाल का तबादला होते ही भाजपा नेता उनकी चाटुकारिता कर प्रवक्ता बनने लगे हैं, जबकि उन्हें लंबित एफसीए मामलों को सुलझाने के लिए प्रयास करना चाहिए था। कांग्रेस नेता ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने नौतोड़ और एफसीए के समाधान के लिए आठ बार पूर्व राज्यपाल से मुलाकात की। ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल ने भेजा प्रस्ताव उनके साथ तीन बार टीएसी के सदस्य भी गए। प्रदेश कैबिनेट और ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल ने इस संबंध में बाकायदा प्रस्ताव पारित कर राजभवन भेजा था, लेकिन भाजपा के कथित दबाव के कारण इसे रोके रखा गया, जो जनजातीय क्षेत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा। जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ मिलना बंद डॉ. बोरस ने स्पष्ट किया कि 1980 के वन संरक्षण अधिनियम के बाद जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ मिलना बंद हो गया था। हालांकि, 2012-13 में तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार के समय जगत सिंह नेगी (तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष) ने अनुच्छेद 5 के तहत राज्यपाल उर्मिला सिंह से मिलकर एफसीए को निरस्त करवाया था। राज्यपाल से जनजातीय समाज को बड़ी उम्मीदें इसी का परिणाम था कि 2016-17 में किन्नौर के लगभग 800 लोगों को नौतोड़ के पट्टे मिल सके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद से यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। डॉ. बोरस ने विश्वास जताया कि प्रदेश में आए नए राज्यपाल से जनजातीय समाज को बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नया राजभवन जनजातीय लोगों के साथ अन्याय नहीं होने देगा और नौतोड़ के रुके हुए रास्तों को बहाल करने में सहयोग करेगा। इस अवसर पर किन्नौर कांग्रेस के कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

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