हिमाचल सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने सुक्खू सरकार के इस निर्णय को असंवैधानिक और तानाशाहीपूर्ण बताया है। BJP के प्रदेश मीडिया भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं नैना देवी से विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम में संशोधन करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं होता, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा कदम उठाकर संविधान की भावना के विपरीत कार्य किया है। रणधीर शर्मा ने कहा कि RTI का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता लाना और आम नागरिकों को शासन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देना है। जब यह कानून पारित हुआ था, उस समय केंद्र में कांग्रेस सरकार थी और मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन आज हिमाचल की कांग्रेस सरकार इस कानून की मूल भावना को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि, प्रदेश का विजिलेंस ब्यूरो भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली महत्वपूर्ण एजेंसी है और ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर करने से यह आशंका पैदा होती है कि सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को सार्वजनिक होने से रोकना चाहती है। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करना चाह रही सरकार: रणधीर रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई से बाहर कर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करना चाहती है और अपने मनमाफिक कार्य करवाने के लिए इस एजेंसी को सरकार की कठपुतली बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है और इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कि RTI नागरिकों को मिला एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार के इस फैसले से आरटीआई कानून के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंच रहा है। सरकार अपना फैसला तुरंत वापस ले: बीजेपी रणधीर ने कहा कि BJP इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है और सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग करती है। रणधीर शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होती है और किसी भी सरकार को जनता से जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं है।